

देहरादून में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने 71 वर्षीय बुजुर्ग को कानून का डर दिखाकर 43 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा और उनसे करीब 64 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित बुजुर्ग जल निगम से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जो ठगों द्वारा रची गई ‘डिजिटल अरेस्ट’ की साजिश में फंस गए। मामले का खुलासा होने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित के अनुसार, 21 नवंबर की दोपहर उन्हें एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को अधिकारी बताते हुए कहा कि दिल्ली में उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। ठग ने धमकी दी कि यदि उन्होंने तुरंत एनओसी नहीं ली तो उनका आधार और पैन कार्ड सील कर दिया जाएगा। इस कॉल के बाद पीड़ित को अलग-अलग नंबरों से लगातार फोन आने लगे और कॉल को कथित तौर पर दिल्ली पुलिस और सीबीआई के अधिकारियों से जोड़ दिया गया।
ठगों ने बुजुर्ग को बताया कि एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिसके पास से ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनमें उनके बैंक खाते का इस्तेमाल करीब छह करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में दिखाया गया है। इसके बाद व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में सामने आया और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी गैर-जमानती वारंट दिखाकर उन्हें डराया गया। कहा गया कि यदि सहयोग नहीं किया गया तो उन्हें तीन महीने के लिए रिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ठगों ने बुजुर्ग को तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और यह सख्त हिदायत दी गई कि वे किसी भी परिजन, मित्र या बैंक अधिकारी से संपर्क न करें। डर और मानसिक दबाव के चलते बुजुर्ग ने अलग-अलग तारीखों में कई बैंक खातों में कुल 64 लाख 65 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
करीब 43 दिनों तक चले इस मानसिक उत्पीड़न के बाद जब कॉल अचानक बंद हो गए, तब पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए और खतरनाक तरीकों की ओर इशारा करता है, जिसमें बुजुर्गों को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है।
फिलहाल साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जिन खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या कथित अधिकारी के दबाव में आकर व्यक्तिगत जानकारी या पैसे साझा न करें और संदेह होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।







