


उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस, पीएसी और आईआरबी भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट देने से संबंधित याचिकाओं का निस्तारण करते हुए चयन प्रक्रिया पर लगी अंतरिम रोक हटा दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में लगभग दो हजार पदों पर पुलिस भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ऐसे में आयु सीमा में छूट देने की मांग पर राज्य सरकार को निर्देश देने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि आयु सीमा में छूट दी भी जाती है, तब भी वे अभ्यर्थी योग्य नहीं ठहरेंगे जिन्होंने विज्ञापन में निर्धारित ऊपरी आयु सीमा पहले ही पार कर ली है। ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता।
यह महत्वपूर्ण निर्णय वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने चमोली निवासी रोशन सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राहत संभव नहीं
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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आयु सीमा में छूट जैसी राहतें नहीं दी जा सकतीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि राज्य गठन के बाद कांस्टेबल भर्ती केवल दो बार 2014 और 2021 में हुई है और वर्तमान भर्ती तीसरी बार की जा रही है। भर्ती में देरी के कारण कई अभ्यर्थियों की आयु सीमा पार हो गई, इसलिए उन्हें छूट दी जानी चाहिए।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि विज्ञापन के अनुसार 18 से 22 वर्ष की आयु वाले अभ्यर्थी ही पात्र थे, जबकि याचिकाकर्ता निर्धारित ऊपरी आयु सीमा पार कर चुके हैं, जिससे वे आवेदन के योग्य नहीं रह जाते।
सरकार की दलीलें
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राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत एवं प्रदीप हेड़िया ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं ने न तो भर्ती विज्ञापन और न ही कट-ऑफ तिथि को चुनौती दी है। वे केवल ऊपरी आयु सीमा में छूट के निर्देश मांग रहे हैं, जबकि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ नियुक्ति पत्र जारी होना शेष है।
सरकार ने यह भी बताया कि सिविल पुलिस, पीएसी और आईआरबी में कांस्टेबलों की भारी कमी है। 2027 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता है, लेकिन कोर्ट की अंतरिम रोक के चलते चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए नहीं भेजा जा पा रहा था। नियुक्ति के बाद चयनित उम्मीदवारों को एक वर्ष का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाना है।
आयु सीमा तय करने का अधिकार राज्य को
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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार एक नियोक्ता के रूप में सार्वजनिक पदों के लिए आयु सीमा तय करने के लिए स्वतंत्र है। सरकार की इस नीति को याचिकाकर्ताओं ने सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी है।
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के अनुरोध पर उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने रिक्त पदों का विज्ञापन जारी किया था और उसमें पात्रता की सभी शर्तें स्पष्ट रूप से उल्लेखित थीं। केवल इस आधार पर चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता कि सरकारी नीति के अनुसार हर वर्ष भर्ती नहीं हो सकी।

