



ऋषिकेश में वनभूमि सर्वे को लेकर सोमवार को विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। स्थानीय लोग दो दिनों से चल रहे सर्वे कार्य के खिलाफ अचानक भड़क उठे और मनसा देवी तिराहे पर हरिद्वार–ऋषिकेश रेल ट्रैक को जाम कर दिया। इसके चलते ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ और यात्री कई घंटे तक फंसे रहे।
जब पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ के जवान मौके पर पहुंचे और भीड़ से ट्रैक खाली करने का आग्रह किया, तो बातचीत में तनाव बढ़ गया और भीड़ ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। पत्थरबाजी से अफरातफरी मच गई और पुलिसकर्मी अपनी जान बचाते हुए भागते नजर आए। पत्थरबाजों ने पुलिस को रेलवे ट्रैक से खदेड़ते हुए हरिद्वार–ऋषिकेश हाईवे तक पहुंचा दिया, जहां भी कुछ लोगों ने हाइवे पर भी जवानों पर पत्थर चलाए। इस दौरान सीओ डॉ. पूर्णिमा गर्ग सहित कई जवान बाल-बाल बचे।
इस हिंसक प्रदर्शन के कारण आधा दर्जन से अधिक एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का संचालन ठप हो गया। चंदौसी–ऋषिकेश पैसेंजर ट्रेन को हरिद्वार पहुंचकर वापस लौटा दिया गया, जबकि गंगा नगर एक्सप्रेस ज्वालापुर स्टेशन पर फंसी रही। योग एक्सप्रेस और बाड़मेर एक्सप्रेस समेत कई अन्य ट्रेनों को भी यातायात बाधा के कारण रुकना पड़ा, जिससे यात्रियों में भारी असुविधा और तनाव पैदा हुआ।
रात करीब छह बजे देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के मौके पर पहुंचने के बाद ट्रैक और सड़क से भीड़ हटाई गई। उन्होंने पुलिस जवानों के साथ मामले से जुड़े क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया और रेलवे ट्रैक व हाईवे पर ट्रेनों तथा वाहनों की आवाजाही सुचारू कराई।
पुलिस ने इस मामले में 218 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिसमें आठ नामजद आरोपी हैं और 150 से 210 अज्ञात पुरुष तथा महिलाएँ शामिल हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर कोतवाली में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सर्वे टीम के साथ गुमानीवाला क्षेत्र में वन विभाग की एक महिला रेंजर के साथ अभद्रता और मारपीट की भी शिकायत पुलिस को दी गई है। महिला रेंजर ने बताया कि उन्हें काम में बाधा, धक्का-मुक्की और वर्दी पकड़ने जैसी हरकतों का सामना करना पड़ा। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर भी अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी पहचान के प्रयास तेज कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों ने सर्वे को लेकर अपनी नाराजगी जताई है, यह कहते हुए कि पहले उन्हें इस कार्य की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और अब उन्हें डर है कि उनकी भूमि छिनी जा सकती है। कई लोगों का कहना है कि वे वर्षों से उसी भूमि पर रहते हैं और अचानक से उस जमीन को वनभूमि बताकर सर्वे करने आना ठीक नहीं है, जिससे विरोध प्रदर्शन भड़क गया।

