

Uttarakhand: भारतीय सेना ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सेना का यह अभियान अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है। यह रिकॉर्ड इसलिए बना क्योंकि भारतीय सेना का दल दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा दल बना, जिसने एक ही बार में सबसे ज्यादा सदस्यों के साथ माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने का इतिहास रचा। इस अभियान में कुल 49 सदस्य शामिल थे। इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी ने किया।

उत्तराखंड के 4 जवान भी टीम में शामिल
इस दल में भारतीय सेना के 22 जवान थे, जिनमें से 4 जवान उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र से थे। इसलिए इस उपलब्धि को लेकर उत्तराखंड में खास खुशी और गर्व देखा जा रहा है। इसके अलावा इस अभियान में नेपाल के 27 अनुभवी शेरपा पर्वतारोही भी शामिल थे, जिन्होंने भारतीय सेना के साथ मिलकर यह कठिन मिशन पूरा किया।
यह पूरा अभियान भारतीय सेना की एडवेंचर विंग के तहत चलाया गया, जिसे ‘सिल्वर जुबली एवरेस्ट अभियान’ नाम दिया गया था।
27 मई 2025 को रचा गया इतिहास
यह रिकॉर्ड 27 मई 2025 को पूरा किया गया था। बाद में जनवरी 2026 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी। यह अभियान वर्ष 2000 में हुए भारतीय सेना के अंतिम एवरेस्ट अभियान की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया था। दल अप्रैल 2025 के मध्य भारत से रवाना हुआ और 23 अप्रैल 2025 को एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचा।
कठिन हालात में चढ़ाई पूरी की
पर्वतारोहियों ने कैंप-1 से कैंप-4 तक धीरे-धीरे चढ़ाई की। इस दौरान उन्हें: अत्यधिक ठंड, तेज हवाएं, ऑक्सीजन की कमी, खराब मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
26 मई की रात अंतिम चढ़ाई शुरू हुई और 27 मई 2025 की सुबह पूरे दल ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराकर इतिहास बना दिया।
साहस और टीमवर्क की मिसाल
लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय सेना के साहस, कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और मजबूत टीम भावना का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यह अभियान भारत और नेपाल के बीच सहयोग और दोस्ती की भी एक शानदार मिसाल है। यह साबित करता है कि जब सभी मिलकर काम करते हैं, तो असंभव काम भी संभव हो जाते हैं।







