



मकर संक्रांति का पर्व सूर्यदेव के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत का मार्ग खुल जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन स्नान, पूजा और दान के लिए अत्यंत पुण्यकारी होता है। माना जाता है कि मकर संक्रांति पर किए गए शुभ कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि लाते हैं।
इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सूर्य देव दोपहर बाद मकर राशि में प्रवेश करेंगे, लेकिन पूरे दिन को संक्रांति का पर्वकाल माना गया है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय स्नान और दान के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर ही स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पूजा विधि की बात करें तो स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर घर के मंदिर में पूजा की जाती है। सूर्य देव का ध्यान करते हुए तांबे के लोटे से जल अर्पित किया जाता है और उनसे सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का विशेष महत्व है। इस दिन तिल के लड्डू, खिचड़ी या गुड़ से बने पकवान भगवान को भोग के रूप में अर्पित किए जाते हैं और फिर परिवारजनों में प्रसाद स्वरूप बांटे जाते हैं। तिल को शुद्धि और गुड़ को मधुरता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन इनके सेवन और दान की परंपरा है।
दान का विशेष महत्व मकर संक्रांति से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। तिल, गुड़, अनाज, वस्त्र, कंबल और जरूरतमंदों के लिए उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। दान का उद्देश्य केवल धार्मिक पुण्य ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ाना भी है। यदि किसी कारणवश 14 जनवरी को स्नान और दान न हो सके, तो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के बाद अगले दिन सुबह किया गया स्नान और दान भी पुण्यकारी माना जाता है।
धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति को देवताओं का प्रभात काल भी कहा जाता है। इस दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि इस पावन अवसर पर क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर शांति और सद्भाव के साथ पर्व मनाना चाहिए। मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और शुभ आरंभ का प्रतीक है।

