


नए साल की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड सरकार राज्य के करीब 10 लाख परिवारों को बड़ी राहत देने जा रही है। सरकार ने दो साल पहले बंद की गई व्यवस्था को फिर से बहाल करते हुए हर माह पांच किलो सस्ता गेहूं उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। इस निर्णय के तहत अब नए साल से राज्य खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ एक बार फिर बड़ी संख्या में परिवारों को मिलने लगेगा, जिससे लाभार्थियों में खुशी का माहौल है।
केंद्र सरकार ने विशेष रूप से उत्तराखंड के लिए इस व्यवस्था को दोबारा लागू करने की मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के करीब 10 लाख परिवारों को हर माह रियायती दर पर पांच किलो गेहूं मिलेगा। अब तक राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को केवल 7.5 किलो चावल ही उपलब्ध कराया जा रहा था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद गेहूं और चावल दोनों के आवंटन में संतुलन देखने को मिलेगा। उत्तराखंड के अपर खाद्य आयुक्त पीएस पांगती के अनुसार, इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से आदेश प्राप्त हो चुके हैं और राज्य को नए अनुपात में अनाज का आवंटन भी कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा फोर्टिफाइड राइस के मानकों में बदलाव किए जाने के कारण हाल के दिनों में चावल के उठान और आपूर्ति में कुछ दिक्कतें आई थीं। इसी वजह से दिसंबर माह में कई स्थानों पर चावल की आपूर्ति बाधित रही। हालांकि अब खरीद और वितरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और एक सप्ताह के भीतर राज्य में चावल की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राज्य के लिए नए मानकों के अनुसार अनाज का आवंटन भी कर दिया है, जिससे आने वाले समय में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि वर्ष 2013-14 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना लागू होने के बाद उत्तराखंड में 15 हजार रुपये तक मासिक आय वाले 12 लाख से अधिक परिवार इसके दायरे में आए थे। केंद्र सरकार के तय मानकों के अनुसार एनएफएसए के तहत राज्य के लिए 60.92 लाख लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को दो रुपये प्रति किलो की दर से दो किलो गेहूं और तीन रुपये प्रति किलो की दर से तीन किलो चावल देने का प्रावधान है। कोरोना महामारी के दौरान और उसके बाद से केंद्र सरकार की ओर से पात्र लाभार्थियों को अनाज मुफ्त में उपलब्ध कराया जा रहा है।
एनएफएसए से वंचित रह गए राज्य के अन्य पात्र परिवारों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तराखंड सरकार ने अक्टूबर 2015 में राज्य खाद्य सुरक्षा योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत लाभार्थियों को 11 रुपये प्रति किलो की दर से ढाई किलो चावल और 8.60 रुपये प्रति किलो की दर से पांच किलो गेहूं देने का प्रावधान किया गया था। अब दो साल बाद गेहूं की आपूर्ति फिर से शुरू होने से बड़ी संख्या में परिवारों को सीधा लाभ मिलने जा रहा है।
दूसरी ओर, राज्य में सरकारी चावल की कमी से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दिसंबर माह में आपूर्ति न होने के कारण राशन कार्ड धारकों को चावल नहीं मिल पाया, जिससे लगभग सभी जिलों में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर चावल का संकट खड़ा हो गया है। यदि समय रहते चावल का कोटा नहीं मिला तो स्कूलों में मिड-डे मील योजना और आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण आहार की व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। कई आंगनबाड़ी केंद्रों में चावल का भंडार पहले ही समाप्त हो चुका है। चावल खरीद की प्रक्रिया में बदलाव के चलते जिलों को समय पर कोटा नहीं मिल पाया है। पूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चावल के कोटे के लिए समय पर मांग भेजी गई थी, लेकिन अब तक मुख्यालय से आपूर्ति नहीं हो सकी है, जिससे प्रदेश में चावल का संकट गहराता नजर आ रहा है।

