


Uttarakhand: वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ साह को उत्तराखंड हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई है। भारत सरकार के कानून और न्याय मंत्रालय ने सोमवार को सिद्धार्थ साह को उत्तराखंड हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की औपचारिक घोषणा की।
राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 224 के खंड (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। नियुक्ति से संबंधित आधिकारिक सूचना उत्तराखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सचिवालय को भेज दी गई है, जिससे न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सके।
सिद्धार्थ साह अब तक उत्तराखंड हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे और न्यायिक कार्यों में उनका लंबा अनुभव रहा है। उनकी नियुक्ति से न्यायिक जगत में उत्साह का माहौल है। भारत सरकार के संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन के हस्ताक्षर से संबंधित आदेश पांच जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित जैसलमेर हाउस से जारी किया गया।
चार सितंबर 1971 को जन्मे सिद्धार्थ साह की प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल के प्रतिष्ठित सेंट जोजफ कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई बिड़ला विद्या मंदिर, नैनीताल से पूरी की। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की, जबकि विधि की पढ़ाई कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर से की। उनके पिता एम. एल. साह स्वयं भी अधिवक्ता रहे हैं, जिससे कानून के क्षेत्र में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है।
परिवार की बात करें तो उनके बड़े भाई दीपांजन साह बेंगलुरु में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी दीप्ति गृहिणी हैं और उनकी दो पुत्रियां हैं। सिद्धार्थ साह के हाई कोर्ट का न्यायाधीश बनने की खबर के बाद शहर में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिल रहा है।
उनकी नियुक्ति पर उत्तराखंड हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीसीएस रावत, महासचिव सौरभ अधिकारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुशील वशिष्ठ सहित पूर्व अध्यक्ष महेंद्र पाल, भुवनेश जोशी और अन्य अधिवक्ताओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। यह नियुक्ति न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि राज्य की न्यायिक व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

