


ऋषिकेश के अमितग्राम क्षेत्र में वनभूमि सर्वे और चिन्हित भूखंडों पर तारबाड़ लगाने के प्रयास ने स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश भड़का दिया। शनिवार को जब सर्वे टीम अपने उपकरणों और मशीनों के साथ भूखंडों पर पहुंची, तो आसपास के कब्जेदारों और ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना था कि लंबे समय से उपयोग में रह रहे या अपने कब्जे में रखे गए भूखंडों पर अचानक इस तरह की कार्रवाई से उन्हें आशंका हुई कि उनकी जमीनों और निवास स्थानों को खतरा हो सकता है। विरोध इतना व्यापक और तीव्र था कि प्रशासन की समझाने की कोशिशें भी नाकाम साबित हुईं।
विरोध के दौरान माहौल अत्यंत तनावपूर्ण हो गया और स्थानीय लोगों ने कार्रवाई में बाधा डालते हुए सर्वे टीम के काम को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, और उन्होंने दो महिलाओं को हिरासत में लेकर कोतवाली ले जाया, जहां से उन्हें शाम तक निजी मुचलके पर रिहा किया गया। विरोध की यह घटना प्रशासन और वन विभाग के लिए चुनौती बन गई, क्योंकि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को बनाए रखना मुश्किल हो गया।
वन विभाग ने बताया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप की जा रही है। 12 वार्डों के पार्षदों को पहले ही नगर निगम कार्यालय में बुलाकर कोर्ट के 22 दिसंबर और 5 जनवरी के आदेशों की जानकारी दी गई थी। इसके तहत कुल 114 भूखंड चिन्हित किए गए हैं और उनके रिकॉर्ड कोर्ट में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से संयम बनाए रखने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
स्थानीय निवासियों का गुस्सा इस बात से जुड़ा है कि लंबे समय से उनके कब्जे में रहे भूखंडों पर अचानक सर्वे और तारबाड़ की कार्रवाई शुरू होने से उन्हें भय और असमंजस का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों की नाराजगी का यह असर इतना बढ़ गया कि इससे पहले भी क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो चुकी है, जिसमें सड़कें और रेलवे ट्रैक जाम करने जैसी घटनाएं सामने आई थीं। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना और भूमि विवादों को कानूनी तरीके से हल करना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या विवाद से बचा जा सके।

