

ऋषिकेश। उत्तराखंड की पावन धरा ऋषिकेश में सेवा और सिमरन का अनमोल केंद्र, गुरमत बाल विद्यालय, अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करने जा रहा है। गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट द्वारा संचालित इस प्रतिष्ठित संस्थान के ‘स्वर्ण जयंती वर्ष’ को यादगार बनाने के लिए आगामी 21 और 22 फरवरी को विद्यालय परिसर में दो दिवसीय भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा।
विरासत और आधुनिकता का संगम
ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह विद्यालय सिख विरासत का एक ऐसा प्रकाश स्तंभ है, जिसने आधी सदी से समाज के वंचित और गरीब परिवारों के बच्चों के जीवन को रोशन किया है। 1976 में स्थापित यह संस्थान पूर्णतः निःशुल्क और आवासीय है, जहाँ छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ गुरमत संगीत और उच्च सिख मूल्यों में निपुण बनाया जाता है।
समारोह के मुख्य आकर्षण:
पूर्व छात्र समागम: विश्वभर में विभिन्न क्षेत्रों और गुरुद्वारों में सेवा दे रहे विद्यालय के पुरातन छात्र (Alumni) इस अवसर पर ऋषिकेश पहुंचेंगे।
शबद कीर्तन: वर्तमान छात्रों के साथ-साथ पूर्व छात्रों द्वारा दिव्य शबद कीर्तन की विशेष प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
उपलब्धियों पर मंथन: पिछले 50 वर्षों की यात्रा, चुनौतियों और विद्यालय की स्वर्णिम उपलब्धियों पर विशेष चर्चा सत्र आयोजित होंगे।
विशाल संगत: देश-विदेश से भारी संख्या में संगत और विशिष्ट अतिथियों के जुटने की संभावना है, जिनके लिए ट्रस्ट द्वारा पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
”वाहेगुरु की कृपा से यह संस्था आने वाले 100 वर्षों तक इसी तरह समाज की सेवा और सिमरन का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी। यहाँ से निकले रागी और कीर्तनिए आज पूरी दुनिया में गुरु की वाणी का प्रसार कर रहे हैं।”
— नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, अध्यक्ष (श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट)
एक नजर: सेवा का आधा दशक
स्थापना वर्ष 1976
संचालक गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट
विशेषता पूर्णतः निःशुल्क, आवासीय और आधुनिक-धार्मिक शिक्षा का मेल
प्रभाव विश्वभर में गुरुवाणी का प्रसार करने वाले कीर्तनियों का निर्माण
यह आयोजन न केवल विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे ऋषिकेश और सिख समाज के लिए गर्व का क्षण है। 50 वर्षों का यह सफर ‘विद्या विचारि तां परउपकारी’ के सिद्धांत को चरितार्थ करता है।







