

Rishikesh: गंगा नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। ऋषिकेश क्षेत्र में गंगा में सीधे प्रवाहित हो रहे ग्रे-वाटर को रोकने के लिए प्रशासन ने अभियान चलाकर 14 भवनों के अपशिष्ट जल का बहाव बंद कराया है। यह कार्रवाई देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर नगर निगम ऋषिकेश और जल संस्थान गंगा की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने ढालवाला नाले के आसपास स्थित भवनों का गहन निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि कुल 21 भवनों में से 14 भवन ऐसे थे, जिनका ग्रे-वाटर बिना किसी सीवर संयोजन के सीधे नालियों के माध्यम से गंगा नदी में प्रवाहित हो रहा था। वहीं शेष सात भवनों का अपशिष्ट जल नियमानुसार सीवर लाइन से जुड़ा हुआ पाया गया। नियमों का उल्लंघन करने वाले भवनों के स्वामियों को तत्काल नोटिस जारी करते हुए उनके ग्रे-वाटर का प्रवाह बंद कराया गया।

इसके साथ ही प्रशासन की टीम ने क्षेत्र की दो प्रमुख नालियों की टैपिंग भी कर दी, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का गंदा पानी खुले नालों के जरिए गंगा में न पहुंच सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गंगा की पवित्रता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाइयां आगे भी लगातार जारी रहेंगी। जिला प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि वे अपने भवनों के अपशिष्ट जल को नियमानुसार सीवर लाइन से जोड़ें और गंगा को प्रदूषित होने से बचाने में सहयोग करें।







