

ऋषिकेश: तीर्थनगरी का मुख्य सरकारी अस्पताल इन दिनों खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है। अस्पताल में लंबे समय से अल्ट्रासाउंड सुविधा ठप होने के कारण गरीब मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह अस्पताल अब केवल ‘रेफरल सेंटर’ बनकर रह गया है।
मरीजों की जेब पर ‘निजी’ प्रहार
अस्पताल में जांच न होने का सीधा फायदा निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को मिल रहा है।
मजबूरी: सक्षम लोग तो निजी सेंटरों में भारी शुल्क चुकाकर जांच करा रहे हैं।
लाचारी: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएं बिना जांच कराए ही घर लौटने को मजबूर हैं।
जोखिम: डॉक्टर्स का मानना है कि गर्भावस्था में समय पर अल्ट्रासाउंड न होना जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
डॉक्टरों की कमी और ‘अस्थायी’ समाधान फेल
अस्पताल की इस बदहाली के पीछे मुख्य कारण डॉक्टरों की कमी और लचर व्यवस्था है:
स्थायी डॉक्टर: अस्पताल के स्थायी रेडियोलॉजिस्ट लंबे समय से बीमार चल रहे हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था: प्रशासन ने डोईवाला से एक महिला डॉक्टर को सप्ताह में दो दिन के लिए संबद्ध किया था।
ताजा संकट: अब वह वैकल्पिक डॉक्टर भी छुट्टी पर चली गई हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह ठप हो गई है।
अधिकारियों का वही पुराना ढर्रा
जब इस अव्यवस्था पर कार्यवाहक सीएमएस आनंद राणा से बात की गई, तो उनके जवाब में कोई ठोस समाधान नजर नहीं आया। उन्होंने केवल इतना कहा कि:
”हमने सीएमओ (CMO) से मामले में वार्ता की है और व्यवस्था बनाने की अपील की है।”







