


उत्तराखंड के ऋषिकेश में वनभूमि सर्वे के विरोध में भड़की हिंसा को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे दो मुख्य साजिशकर्ता सक्रिय थे, जिन्होंने जानबूझकर माहौल को भड़काया और भीड़ को हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाया। इन लोगों के उकसावे पर हाईवे और रेलवे ट्रैक पर पथराव किया गया, जिससे क्षेत्र में भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इस मामले में अब तक कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और पुलिस ने पत्थरबाजी में शामिल आरोपियों की पहचान के लिए उनकी तस्वीरें भी सार्वजनिक कर दी हैं।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि वनभूमि सर्वे के विरोध के नाम पर पहले सड़क और रेलवे ट्रैक को जाम किया गया। इससे ट्रेनों का संचालन बाधित हुआ और आम जनता के साथ-साथ आपात सेवाओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ा। स्थिति बिगड़ते ही उग्र भीड़ ने पुलिसकर्मियों, वन विभाग के कर्मचारियों और रेलवे ट्रैक पर तैनात सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
इस मामले में पुलिस ने कुल 1058 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इनमें से 28 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 1030 लोगों को अज्ञात आरोपी के रूप में शामिल किया गया है। पुलिस ने हिंसा और पथराव की साजिश रचने के आरोप में सीताराम राणाकोटी और लालमणि रतूड़ी को मुख्य मास्टरमाइंड बताया है। इनके अलावा कुछ अन्य प्रमुख आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और उनके खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।
ऋषिकेश पुलिस प्रशासन ने आरपीएफ, जीआरपी और वन विभाग के साथ मिलकर हिंसा से जुड़े वीडियो और फोटो सार्वजनिक किए हैं, जिनमें कई लोग हाथों में पत्थर लिए साफ दिखाई दे रहे हैं। एसएसपी अजय सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि वे इन तस्वीरों में दिख रहे किसी व्यक्ति को पहचानते हैं तो तुरंत नजदीकी कोतवाली में सूचना दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला 28 दिसंबर को उस समय भड़का था, जब वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों ने सड़कों और रेलवे ट्रैक पर जमकर हंगामा किया था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई के लिए ठोस सबूत जुटाने में लगी हुई है, ताकि हिंसा में शामिल सभी लोगों को कानून के शिकंजे में लाया जा सके।

