


ऋषिकेश में क्रिसमस को लेकर हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। 25 दिसंबर की तैयारियों के बीच देवभूमि में विरोध की ज्वाला भड़क उठी है। इस बार क्रिसमस का त्योहार हिंदू संगठनों के सीधे निशाने पर है। राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन ने भारत में क्रिसमस मनाए जाने पर न केवल कड़ी आपत्ति जताई है, बल्कि इसे देश के शहीदों का अपमान करार दिया है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राघवेन्द्र भटनागर ने तीखे तेवरों में कहा कि क्रिसमस भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि पाश्चात्य संस्कृति और अंग्रेजों का थोपा हुआ त्योहार है। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जिन अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाया। जिनसे आजादी पाने के लिए हमारे सैकड़ों क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। आज उन्हीं का त्योहार मनाकर हम अपने शहीदों के बलिदान का मजाक उड़ा रहे हैं।
भटनागर ने सनातन धर्म के अनुयायियों को नसीहत दी है कि वे इस ‘विदेशी दिखावे’ से दूर रहें। उनका कहना है कि अंग्रेज तो चले गए, लेकिन अपनी ‘मानसिक गुलामी’ कुछ लोगों के दिमाग में छोड़ गए हैं। संगठन की मांग है कि सनातन दिवस और तुलसी पूजन दिवस जैसे भारतीय संस्कारों को बढ़ावा दिया जाए। सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी संस्कृति के बजाय स्वदेशी परंपराओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
संगठन का मानना है कि क्रिसमस मनाना उन क्रांतिवीरों का अपमान है जिन्होंने ‘वंदे मातरम’ कहते हुए फांसी के फंदों को चूम लिया था। ऋषिकेश जैसे आध्यात्मिक केंद्र में इस तरह के कड़े रुख के बाद अब प्रशासन और स्थानीय व्यापारियों की धड़कनें बढ़ गई हैं।

