


ऋषिकेश में शनिवार को सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर भव्य सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया गया। यह पर्व न केवल मंदिर की सहनशीलता और पुनर्निर्माण की गाथा का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था की मजबूती को भी उजागर करता है। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिकों की बड़ी संख्या ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
भाजपा विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक हमलों के बावजूद इसकी आस्था और अस्तित्व आज भी अडिग हैं, और यही भारतीय संस्कृति की दुर्जेयता और सनातन चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, इतिहास और धार्मिक आस्था से जोड़ने का माध्यम है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन सोमेश्वर महादेव मंदिर में किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर देश और समाज की शांति, समृद्धि और विकास की कामना की। कार्यक्रम में मेयर शंभू पासवान, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र तड़ियाल और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन और प्रार्थना की, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा की भावना व्याप्त हो गई।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस अवसर का उपयोग केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं किया, बल्कि इसे भारतीय संस्कृति और गौरव का प्रतीक मानते हुए जनमानस में इसका संदेश फैलाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व न केवल इतिहास की गाथा याद दिलाता है, बल्कि लोगों में देशभक्ति और सांस्कृतिक जागरूकता भी पैदा करता है।
यह पर्व सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर 1026 ईस्वी में हुए पहले हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने की स्मृति में आयोजित किया गया, और इसे भारतीय आस्था, सहनशीलता और संस्कृति की ताकत का प्रतीक माना जाता है। इस ऐतिहासिक वर्ष में आयोजित समारोह ने यह संदेश भी दिया कि चाहे समय कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ लेकर आएं, भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था अडिग और अटल बनी रहती है।

