

देहरादून: पर्वतीय क्षेत्रों में आंतरिक पैदल मार्गों के निर्माण में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले सीसी मार्ग बनाए जाते थे, अब उनकी जगह इंटरलॉक टाइलों से पैदल मार्ग तैयार किए जा रहे हैं। विकासखंड में जिला योजना और राज्य योजना के तहत अब सीमेंट कंक्रीट मार्गों के बजाय इंटरलॉक टाइलों वाले मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इंटरलॉक टाइलों से बने मार्ग न केवल कम समय में तैयार हो जाते हैं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के लिहाज से अधिक सुरक्षित और टिकाऊ भी साबित हो रहे हैं।

बरसात के मौसम में सीसी पैदल मार्गों पर काई जम जाना आम समस्या रही है, जिससे राहगीरों के फिसलने का खतरा बना रहता है। कई बार ग्रामीण काई लगे रास्तों पर फिसलकर चोटिल भी हो जाते हैं। ऐसे में इंटरलॉक टाइलों से बने मार्ग इन समस्याओं से काफी हद तक राहत देते हैं और बारिश के दौरान भी पैदल चलने के लिए सुरक्षित बने रहते हैं।
विकासखंड अधिकारियों के अनुसार सीसी मार्ग निर्माण के दौरान देखरेख एक बड़ी चुनौती होती थी। यदि किसी ऐसे मार्ग पर सीसी निर्माण किया जाता है जहां आवाजाही अधिक होती है, तो मार्ग को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं होता। जबकि नियमों के अनुसार सीसी मार्ग बनने के बाद कम से कम 15 दिनों तक तराई की प्रक्रिया आवश्यक होती है, ताकि कंक्रीट पूरी तरह मजबूत हो सके। इस दौरान न तो पैदल आवाजाही और न ही पालतू पशुओं का आवागमन किया जा सकता है। निर्धारित समय तक तराई न हो पाने की स्थिति में सीमेंट कमजोर पड़ जाता है, जिससे सीसी मार्ग जल्दी टूटने लगते हैं।
इसके विपरीत इंटरलॉक टाइलों से बने पैदल मार्गों में ऐसी समस्या नहीं आती। नजदीकी बाजारों और फैक्ट्रियों से पहले से तैयार और प्रयोगशाला में जांची गई टाइलें मंगाई जाती हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित रहती है। इंटरलॉक बिछाने से पहले नीचे रेत की कच्ची परत डाली जाती है और उसके ऊपर टाइलें लगाई जाती हैं। दोनों किनारों पर टाइलों के उखड़ने से बचाने के लिए सीमित मात्रा में सीमेंट का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद मार्ग पर तुरंत आवाजाही भी शुरू की जा सकती है, जिससे ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती।
इन्हीं सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए अब जिला योजना और राज्य योजना के अंतर्गत गांवों के पैदल मार्गों के लिए इंटरलॉक टाइलों के निर्माण को लेकर धनराशि जारी की जा रही है। हालांकि किसी पंचायत में सीसी मार्ग बनेगा या इंटरलॉक टाइलों का मार्ग, इसका निर्णय ग्राम पंचायत और ग्रामीणों की सहमति से लिया जाता है।
वर्तमान समय में विकासखंड के जुलेड़ी गांव में लगभग दो लाख रुपये की लागत से आंतरिक पैदल मार्ग पर इंटरलॉक टाइलों का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 15 वर्ष पूर्व बने जर्जर सीसी मार्ग के स्थान पर अब नया इंटरलॉक मार्ग तैयार किया जा रहा है। ग्राम प्रधान रजनी देवी ने बताया कि प्रधान बनने के बाद पंचायत क्षेत्र में यह उनका पहला कार्य है, जिसे लेकर ग्रामीणों में उत्साह है।
इस संबंध में सहायक विकास अधिकारी यमकेश्वर दिनेश रावत ने बताया कि पंचायत अधिकारियों को अच्छी गुणवत्ता की इंटरलॉक टाइलों से ही पैदल मार्ग निर्माण के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण कार्य के दौरान विभागीय कर्मचारी और अभियंता मौके पर पहुंचकर गुणवत्ता की जांच भी करेंगे, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत मार्ग मिल सके।







