


उत्तराखंड में मदरसों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों के लिए अच्छी खबर है। अब मदरसों की पढ़ाई को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनके शैक्षिक प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी के लिए मान्य होंगे।
अब तक मदरसों से पढ़कर निकलने वाले छात्र-छात्राओं के सर्टिफिकेट को 10वीं और 12वीं के बराबर मान्यता नहीं मिलती थी। इसी वजह से वे सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर पाते थे। इससे उनके भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा था।
प्रदेश में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद 452 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से जोड़ा जाएगा। इससे हजारों बच्चे सामान्य शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनेंगे। अब उनके प्रमाण पत्र उत्तराखंड बोर्ड के समान मान्य होंगे।
अब तक प्रदेश के मदरसों से 43 हजार से ज्यादा छात्र मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल जैसी डिग्री कर चुके हैं। लेकिन इन डिग्रियों को 10वीं और 12वीं के बराबर मान्यता नहीं मिली थी, इसलिए उन्हें नौकरी में परेशानी होती थी।
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने बताया कि लंबे समय से मदरसा बोर्ड को उत्तराखंड बोर्ड के बराबर मान्यता दिलाने की कोशिश की जा रही थी। अब उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता मिलने के बाद बच्चों के प्रमाण पत्र मान्य हो जाएंगे।
उत्तराखंड बोर्ड से जुड़ने के लिए मदरसों को तय मानकों को पूरा करना होगा। प्राथमिक स्तर के मदरसों को प्राथमिक शिक्षा केनियमों का पालन करना होगा और माध्यमिक स्तर के मदरसों को माध्यमिक शिक्षा के मानकों पर खरा उतरना होगा।
अब मदरसों में बच्चे दोपहर तक उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। इसके बाद वे धार्मिक शिक्षा भी ले सकेंगे। धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तय करेगा। इस फैसले से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर भविष्य और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।







