


उत्तराखंड: इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) 2.0 की मासिक रैंकिंग में उत्तराखंड पुलिस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है। मित्र पुलिस ने यह उपलब्धि हरियाणा पुलिस को पीछे छोड़ते हुए दर्ज की है। इस संबंध में जानकारी बृहस्पतिवार को पुलिस प्रवक्ता और आईजी कानून व्यवस्था सुनील कुमार मीणा ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान दी।
आईजी मीणा ने बताया कि उत्तराखंड पुलिस ने डिजिटल पुलिसिंग और आपराधिक न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बार फिर अपनी अग्रणी भूमिका को साबित किया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी सीसीटीएनएस-आईसीजेएस प्रगति डैशबोर्ड रिपोर्ट में उत्तराखंड पुलिस को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य पुलिस की तकनीकी दक्षता, नई प्रणालियों को तेजी से अपनाने की क्षमता और प्रदेश के सभी जिलों के बीच मजबूत समन्वय का प्रतिफल है।
आईजी मीणा ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईसीजेएस 2.0 को वर्ष 2026 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस प्रणाली के तहत पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फोरेंसिक और फिंगर प्रिंट्स से जुड़े डाटा को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जाना है। उत्तराखंड ने इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से अपनाते हुए अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम की है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड को 93.46 अंक प्राप्त हुए हैं, जबकि हरियाणा 93.41 अंकों के साथ दूसरे और असम पुलिस 93.16 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रही है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के सभी जिलों में केस डायरी, चार्जशीट, डिजिटल साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेज अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा रहे हैं, जिससे मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है।
इसके साथ ही आईजी मीणा ने प्रयागराज महाकुंभ के दौरान उत्तराखंड एसडीआरएफ की सराहनीय भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ की टीम ने आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा टीम को मेडल देकर सम्मानित किया गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान डीआईजी कानून व्यवस्था धीरेंद्र गुंज्याल, एसपी कानून व्यवस्था विशाखा अशोक भदाणे और एसडीआरएफ के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी भी मौजूद रहे।

