



Rishikesh: मोटे अनाज यानी मिलेट्स से बने लड्डू शरीर में आयरन और कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने में बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। एम्स के चिकित्सकों द्वारा किए गए एक हालिया शोध में यह सामने आया है कि युवा महिलाओं में आयरन और कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए मिलेट-आधारित पूरक आहार एक प्रभावी, सुरक्षित और किफायती विकल्प बन सकता है। हालांकि, इस शोध के निष्कर्ष अभी किसी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित नहीं हुए हैं, लेकिन एम्स प्रशासन का कहना है कि इन्हें शीघ्र ही प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा।
मिलेट्स, जिन्हें आमतौर पर मोटे अनाज कहा जाता है, में ज्वार, बाजरा, रागी (फिंगर मिलेट), कोदा, कंगनी (फॉक्सटेल मिलेट), कुटकी, सामा (लिटिल मिलेट) और झंगोरा (बार्नयार्ड मिलेट) जैसे अनाज शामिल हैं। ये सभी अनाज प्रोटीन, फाइबर और खनिज तत्वों से भरपूर होते हैं। इन्हीं पोषक गुणों को ध्यान में रखते हुए एम्स के कॉलेज ऑफ नर्सिंग और शरीर क्रिया विज्ञान विभाग ने यह शोध किया कि मिलेट्स से बने लड्डू किशोरियों और युवतियों के स्वास्थ्य के लिए कितने लाभकारी हो सकते हैं।

एम्स कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल प्रोफेसर स्मृति अरोड़ा के अनुसार, शोध में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि मिलेट-आधारित लड्डुओं के नियमित सेवन से युवतियों के शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का स्तर बढ़ता है। खास बात यह रही कि इस दौरान छात्राओं के शरीर के वजन या शारीरिक संरचना पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया, जो इसे एक सुरक्षित पोषण विकल्प बनाता है।
यह अध्ययन तीन महीने तक चला, जिसमें हॉस्टल में रहने वाली 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग की 100 से अधिक स्नातक नर्सिंग छात्राओं को शामिल किया गया। इन छात्राओं को दो समूहों में बांटा गया। प्रायोगिक समूह की छात्राओं को 90 दिनों तक प्रतिदिन 50 ग्राम मिलेट-आधारित लड्डू उनके नियमित आहार के साथ दिए गए, जबकि नियंत्रण समूह की छात्राओं को केवल हॉस्टल का सामान्य आहार ही दिया गया। प्रशिक्षित आहार विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किए गए इन लड्डुओं में रागी, भुना हुआ चना, गुड़ और घी का उपयोग किया गया था।
तीन महीने के अध्ययन के बाद जो परिणाम सामने आए, वे काफी उत्साहजनक रहे। प्रोफेसर अरोड़ा के अनुसार, प्रायोगिक समूह की छात्राओं में हीमोग्लोबिन, सीरम फेरिटिन और सीरम कैल्शियम के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, नियंत्रण समूह की छात्राओं में इन मानकों में कोई खास सुधार नहीं देखा गया और इस समूह में सीरम फेरिटिन का स्तर अपेक्षाकृत कम बना रहा। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य में युवा महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से निपटने के लिए मिलेट-आधारित आहार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

