

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने युवाओं को राष्ट्र और भविष्य का पथप्रदर्शक बताते हुए उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संदेश दिया। उन्होंने भारतीय प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आज का युग अपार अवसरों का है, जहां युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बनकर देश के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
शुक्रवार को पीएलएमएस परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद ऑडिटोरियम में आयोजित इस भव्य दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल ने कहा कि डिग्री प्राप्त करने वाले करीब 21 हजार युवा आज केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य इन्हीं युवाओं के हाथों में है और 2047 तक विकसित भारत के जिस रोल मॉडल की परिकल्पना की गई है, उसमें सबसे अहम भूमिका युवा शक्ति की होगी। उन्होंने कहा कि सभी की आंखों में एक बेहतर और सशक्त भारत का सपना झलक रहा है।
अपने प्रेरक संबोधन में राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि वे खुली आंखों से बड़े और ऊंचे सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए कठोर परिश्रम, अनुशासन और अटूट संकल्प को अपने जीवन का मंत्र बनाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपने केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आज का समय प्रतिस्पर्धा और तकनीक का है। डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में दक्षता हासिल करना समय की मांग है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति भारतीय शिक्षा प्रणाली को गुलामी की मानसिकता से मुक्त कर, भारतीय मूल्यों, नवाचार और आधुनिक तकनीक से समृद्ध करने का सशक्त माध्यम बनेगी।
उन्होंने युवाओं से विश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि ये युवा 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता के साथ साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विविधताओं से भरे देश में एकता को मजबूत करना हर भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने संस्कृत और कंप्यूटर भाषा के बीच गहरे संबंध की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी अपनी भाषा है और कंप्यूटर व उसकी भाषा भी हमारे ज्ञान और सोच से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर, सुपर कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का डीएनए भारतीय डीएनए से मेल खाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें संपूर्ण बुद्धिमत्ता की ओर ले जाएगा और यही संपूर्ण बुद्धिमत्ता हमें ब्रह्मांड की चेतना से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
राज्यपाल ने युवाओं को सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की भी सख्त नसीहत दी। उन्होंने कहा कि नशा समाज और आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद कर देता है, जबकि भ्रष्टाचार समाज को भीतर से खोखला कर देता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भ्रष्टाचार लेने वाला और देने वाला दोनों ही रावण के समान हैं और इससे दूर रहना ही सच्ची देशभक्ति है।
एक भावुक प्रसंग साझा करते हुए राज्यपाल ने बताया कि एक अन्य राज्य की छात्रा जब स्वर्ण पदक लेने आई तो उन्होंने उससे पूछा कि क्या उसके साथ कोई परिजन आया है। इस पर छात्रा ने जवाब दिया कि उसके साथ उसके गुरु आए हैं और वही उसका परिवार हैं। राज्यपाल ने कहा कि गुरु के प्रति ऐसी भावना से अधिक पवित्र और महान सोच कुछ नहीं हो सकती। उन्होंने उत्तराखंड की धरती की विशेषता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भूमि में दिव्यता, पवित्रता और शुद्धता स्वाभाविक रूप से विद्यमान है। जो भी यहां आता है, यहीं का होकर रह जाता है, क्योंकि यहां आत्मा स्वयं बोलती है।
समारोह के दौरान जब कुछ लोग मोबाइल फोन में व्यस्त नजर आए तो राज्यपाल ने इस पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि अनुशासन जीवन का मूल आधार है और बिना अनुशासन के न तो व्यक्तिगत प्रगति संभव है और न ही राष्ट्र का विकास। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत के निर्माण में अनुशासन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।







