

ऋषिकेश: देवभूमि को शर्मसार कर देने वाला एक बेहद संवेदनशील और मानवता को झकझोर देने वाला मामला ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट से सामने आया है। जिस गंगा तट पर लोग अपने पाप धोने और पुण्य कमाने आते हैं, उसी पवित्र स्थान पर दो युवकों ने एक मासूम, असहाय और दिव्यांग बच्चे को बोझ समझकर लावारिस छोड़ दिया। करीब 10 वर्ष का यह बच्चा न बोल सकता है और न ही चलने-फिरने में सक्षम है, जिससे उसकी बेबसी और पीड़ा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
घटना 22 जनवरी की दोपहर की बताई जा रही है, जब त्रिवेणी घाट पर मौजूद लोगों ने एक दिव्यांग बच्चे को रोते-बिलखते देखा। बच्चे की हालत देखकर आसपास के लोगों ने उसके परिजनों की तलाश करने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक पूछताछ के बाद भी कोई जानकारी सामने नहीं आई। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चे को सुरक्षित रूप से कोतवाली ले आई।

इसके बाद पुलिस ने घाट और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि दो युवक बच्चे को त्रिवेणी घाट तक लेकर आए थे और उसे वहीं बेसहारा छोड़कर फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज में एक युवक के हाथ में हेलमेट भी दिखाई दे रहा है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि दोनों युवक बच्चे को बाइक से घाट तक लाए होंगे और फिर उसे छोड़कर चले गए।
कोतवाल कैलाश चंद्र भट्ट ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है और पुलिस इसकी गहन जांच कर रही है। फिलहाल दोनों युवकों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए त्रिवेणी घाट के साथ-साथ आसपास के बाजारों और रास्तों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर ये युवक कौन हैं और बच्चे को यहां छोड़ने के पीछे उनकी मंशा क्या थी।
पुलिस का कहना है कि जल्द ही यह स्पष्ट किया जाएगा कि दिव्यांग बच्चा कौन है, वह कहां का रहने वाला है और उसे इस तरह एक पवित्र स्थल पर बेसहारा क्यों छोड़ा गया। फिलहाल बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की टीम के माध्यम से देहरादून भेज दिया गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है। यह घटना समाज से एक गंभीर सवाल पूछती है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं, जब एक असहाय बच्चे को भी बोझ समझकर छोड़ दिया जाता है।







