होली का हुड़दंग: रंगों के बीच सेहत का भी रखें ख्याल, रसायनों से बचें



न्यूज डेस्क: रंगोत्सव में अब बस दो दिन का समय शेष है, लेकिन फिज़ाओं में होली की खुमारी अभी से घुलने लगी है। बाजारों में रौनक अपने चरम पर है; कहीं चटकीले गुलाल के ढेर लगे हैं, तो कहीं बच्चों को लुभाती आधुनिक पिचकारियां। हालांकि, इस उल्लास के बीच विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है—सावधानी हटती है, तो होली का रंग फीका पड़ सकता है।
बाजार का हाल: प्राकृतिक बनाम केमिकलयुक्त रंग
इस साल बाजार में एक सुखद बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग अपनी सेहत के प्रति जागरूक हुए हैं और हर्बल व प्राकृतिक रंगों को तरजीह दे रहे हैं। फूलों और पत्तियों से बने ये रंग त्वचा के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
किन्तु, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि बाजार में अभी भी सस्ते केमिकलयुक्त कृत्रिम रंग धड़ल्ले से बिक रहे हैं। इन रंगों में अक्सर ‘कॉपर सल्फेट’, ‘एल्युमिनियम ब्रोमाइड’ और ‘पारा’ जैसे खतरनाक तत्व होते हैं, जो त्वचा और आंखों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।
त्वचा और आंखों के लिए ‘सुरक्षा कवच’
खुशियों के इस त्योहार में आपकी त्वचा और आंखें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित सावधानियां बरतकर आप सुरक्षित होली मना सकते हैं:
-
त्वचा की सुरक्षा: होली खेलने से पहले पूरे शरीर पर नारियल या सरसों का तेल लगाएं। यह त्वचा पर एक सुरक्षा परत बना देता है, जिससे रंग सीधे रोमछिद्रों में नहीं समाते।
-
आंखों का बचाव: आंखों में रंग जाना सबसे खतरनाक हो सकता है। होली खेलते समय धूप के चश्मे (Sunglasses) का प्रयोग करें। यदि आंखों में रंग चला जाए, तो उसे रगड़ने के बजाय ठंडे पानी के छीटें मारें।
-
फुल स्लीव्स के कपड़े: कोशिश करें कि ऐसे कपड़े पहनें जिससे शरीर का अधिकतम हिस्सा ढका रहे।
-
नाखूनों का ख्याल: नाखूनों को रंगों से बचाने के लिए उन पर गहरे रंग की नेल पॉलिश लगा लें।
-
विशेषज्ञ की सलाह: “यदि रंग खेलने के बाद त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते महसूस हों, तो तुरंत साबुन के बजाय उबटन या क्लींजिंग मिल्क का उपयोग करें। समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।”







