

उत्तराखंड सरकार ने इस बार के बजट में महिलाओं के सशक्तीकरण और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को प्राथमिकता देते हुए जेंडर बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में जहां जेंडर बजट के लिए 16,961.32 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर 19,692.02 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर ही समाज के समग्र विकास की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं, माताओं और बेटियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका को मजबूत करने के लिए बजट में अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
महिलाओं और बेटियों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए बजट में विशेष राशि निर्धारित की गई है। नन्दा गौरा योजना के लिए 220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्रमुख योजना है। इसी तरह प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 47.78 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता और पोषण संबंधी सुविधाएं मिल सकें। बच्चों और माताओं के पोषण को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना के लिए 25 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के लिए 13.44 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा प्रसूता और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए 30 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के लिए 15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि के लिए 8 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वहीं निराश्रित विधवाओं की बेटियों के विवाह में सहायता देने के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
अल्पसंख्यक समुदाय की मेधावी बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 3.76 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम करने के लिए मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के तहत 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही राज्य में प्रसूता महिलाओं को सहायता देने के उद्देश्य से ईजा-बोई शगुन योजना के लिए कुल 122 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
महिलाओं की आजीविका और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना के लिए 2 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। वहीं खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गंगा गाय महिला डेयरी विकास योजना के लिए भी 5 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को डेयरी व्यवसाय के माध्यम से आय के नए अवसर मिल सकें।







