भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन मार्ग निर्माण के आड़े आ रहे पेड़ों के कटान का काम आखिरकार भारी पुलिस सुरक्षा के बीच दोबारा शुरू हो गया है। आंदोलनकारियों के कड़े विरोध के चलते पिछले चार दिनों से इस काम पर रोक लगी हुई थी, लेकिन सोमवार सुबह से ही प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ कटान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। पहले दिन करीब 100 पेड़ों को काटा गया।
पुलिस छावनी में तब्दील रहा क्षेत्र, पहले दिन कटे 100 पेड़ पर्यावरणप्रेमी इस कटान में किसी तरह का व्यवधान न डाल सकें, इसके लिए शासन द्वारा मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सोमवार सुबह होते ही भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग पर सन्नाटा पसर गया। एक तरफ पुलिस का कड़ा पहरा था, तो दूसरी तरफ मशीनें और वन विभाग की टीमें तैयार थीं। विरोध की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। हालांकि, इसके बावजूद मौके पर मौजूद लोगों ने विरोध दर्ज कराया, लेकिन पुलिस बल और प्रशासनिक सख्ती के आगे आंदोलनकारियों की एक न चली। हल्के-फुल्के विरोध और गतिरोध के बीच सोमवार को करीब 100 पेड़ काट गिराए गए।
कटान देख बिलख पड़े पर्यावरणप्रेमी जैसे ही आरी की आवाज के साथ सालों पुराना एक विशालकाय पेड़ जमीन पर गिरा, वहां मौजूद पर्यावरणप्रेमियों का सब्र टूट गया। कई लोग इस दृश्य को देखकर बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखें छलक आईं। कोई सड़क किनारे बैठकर फफक-फफक कर रोने लगा, तो किसी ने दुख और लाचारी में अपना चेहरा हाथों से ढक लिया। कुछ आंदोलनकारियों ने सड़क पर बैठकर कटान रोकने की आखिरी कोशिश भी की, लेकिन सुरक्षा घेरे के कारण वे मशीनों तक नहीं पहुंच पाए।
परियोजना के तहत कटने हैं 3000 से अधिक पेड़ गौरतलब है कि भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना को पूरा करने के लिए मार्ग में आने वाले संरक्षित प्रजाति के तीन हजार से अधिक पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है। पर्यावरणप्रेमी और स्थानीय लोग इन बेशकीमती पेड़ों को बचाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इसी आंदोलन के दबाव में हाल ही में कटान का काम रोक दिया गया था, जिसे अब पुलिस बल के साये में दोबारा शुरू कर दिया गया है।

