
ऋषिकेश। आगामी मानसून और क्षेत्र की आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए ऋषिकेश प्रशासन ने गंगा के मुख्य तट, त्रिवेणी घाट पर एक वृहद आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारियों और उनके बीच आपसी समन्वय (Coordination) को परखना था।
काल्पनिक संकट: जब 2 मीटर बढ़ गया गंगा का जलस्तर

मॉक ड्रिल के दौरान एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बनाई गई। सूचना दी गई कि ऊपरी क्षेत्र के बांध से अचानक 5000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण गंगा का जलस्तर 1.5 से 2 मीटर तक बढ़ गया है। इस आपातकालीन सूचना के मिलते ही पूरा प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया।
विभागों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारियां
एसडीएम ऋषिकेश, योगेश मेहरा के नेतृत्व में इस पूरे ऑपरेशन को विभिन्न सेक्शन्स में बांटकर अंजाम दिया गया:
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सेक्शन |
जिम्मेदारी |
नेतृत्व/विभाग |
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ऑपरेशन सेक्शन |
फील्ड रेस्क्यू और सुरक्षा |
सीओ ऋषिकेश |
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प्लानिंग सेक्शन |
पूरी रणनीति और योजना |
सहायक नगर आयुक्त, नगर निगम |
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लॉजिस्टिक्स |
संसाधन और मशीनरी का प्रबंध |
पीडब्ल्यूडी (PWD) |
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रेस्क्यू & रिलीफ |
बचाव और राहत कार्य |
फायर ब्रिगेड, पुलिस और जल संस्थान |
कैसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन?
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- त्वरित निकासी: सूचना मिलते ही प्रशासन ने बेहद कम समय में पूरे घाट क्षेत्र को खाली कराया।
- पशु संरक्षण: नगर निगम की विशेष टीम ने घाट क्षेत्र में मौजूद मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
- रेस्क्यू और मेडिकल: नदी में फंसे या बह रहे लोगों (काल्पनिक पात्रों) को रेस्क्यू कर तत्काल मेडिकल कैंप और रिलीफ सेंटरों तक पहुँचाया गया।
”इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वास्तविक आपदा के समय प्रतिक्रिया का समय (Response Time) न्यूनतम हो। हमने दिखाया कि कैसे सीमित समय में घाटों को खाली कराकर जन-धन की हानि को रोका जा सकता है।”
— योगेश मेहरा, एसडीएम ऋषिकेश
बेहतर तालमेल की सराहना
इस अभ्यास में पुलिस, फायर ब्रिगेड, जल संस्थान, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और परिवहन विभाग जैसे कई लाइन विभागों ने सक्रिय भागीदारी की। एसडीएम ने सभी विभागों के बीच सटीक तालमेल की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे अभ्यास जारी रहेंगे ताकि शहर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा सके।

