एम्स ऋषिकेश में गुरुवार को सतत नर्सिंग शिक्षा (कंटीन्यूअस नर्सिंग एजुकेशन) के अंतर्गत एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें नर्सिंग अधिकारियों को मरीजों की देखभाल के दौरान भावनात्मक मजबूती और संवेदनशील व्यवहार की महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नर्सिंग स्टाफ को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बनाना था, बल्कि उन्हें मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशील और संतुलित व्यवहार करने के लिए भी तैयार करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर मीनू सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नर्सिंग पेशा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का प्रतीक है। कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब नर्सिंग अधिकारियों को मरीजों के लिए अभिभावक जैसी भूमिका निभानी पड़ती है। ऐसे में उनके व्यवहार में धैर्य, संवेदनशीलता और भावनात्मक संतुलन होना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को बेहतर देखभाल के साथ-साथ मानसिक सहारा भी मिल सके।
इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रोफेसर सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि किसी भी अस्पताल की कार्यप्रणाली में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने नर्सिंग पेशे को अस्पताल की रीढ़ बताते हुए कहा कि मरीजों की सेवा और देखभाल में नर्सिंग अधिकारियों का योगदान सबसे अहम होता है। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ से टीम भावना के साथ काम करने और मरीजों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर बी. सत्या श्री ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि नर्सिंग पेशा बेहद चुनौतीपूर्ण है और इसमें निरंतर सीखते रहना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नर्सिंग अधिकारियों के ज्ञान और कौशल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे वे मरीजों को और अधिक प्रभावी ढंग से सेवाएं दे सकें।
कार्यक्रम के दौरान उप निदेशक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा, डीन रिसर्च प्रोफेसर शैलेन्द्र हाण्डू और कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य प्रोफेसर स्मृति अरोड़ा ने भी नर्सिंग स्टाफ को संबोधित करते हुए उनके कार्य की सराहना की और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निभाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य नर्सिंग अधिकारी डॉ. अनिता रानी कंसल ने बताया कि यह कार्यशाला एक सप्ताह तक चलने वाले इंडक्शन प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके माध्यम से नए नर्सिंग अधिकारियों को तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें अस्पताल की कार्यप्रणाली, मरीजों की देखभाल की प्रक्रियाओं और भावनात्मक संतुलन के महत्व से अवगत कराना है, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को और बेहतर ढंग से निभा सकें। कार्यक्रम में डीएमएस डॉ. रवि कुमार, पीआरओ डॉ. श्रीलोय मोहंती सहित कई नर्सिंग अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

