ऋषिकेश: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश ने परिसर के भीतर सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह द्वारा जारी नए सर्कुलर के अनुसार, अब कैंपस में दोपहिया वाहन चलाने वाले चालक के साथ-साथ पीछे बैठने वाले व्यक्ति (पिलियन राइडर) के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी पुलिसिया कार्रवाई
संस्थान प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों में अब किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। नियमों को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:
-
प्रवेश पर रोक: बिना हेलमेट के किसी भी दोपहिया वाहन को संस्थान के मुख्य गेट से भीतर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
-
गति सीमा: कैंपस के अंदर वाहनों की अधिकतम गति 20 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
-
कानूनी कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वालों के साक्ष्य (सीसीटीवी/फोटो) जुटाकर पुलिस विभाग को भेजे जाएंगे, ताकि मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सके।
सुरक्षा विभाग को ‘जीरो टॉलरेंस’ के निर्देश
एम्स के पीआरओ डॉ. श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि पूर्व में भी निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन लोग हेलमेट पहनने में लापरवाही बरत रहे थे।
मरीजों, डॉक्टरों और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सुरक्षा विभाग को हर वाहन की सघन चेकिंग के निर्देश दिए गए हैं।
“परिसर को सुरक्षित और अनुशासित रखना हमारी प्राथमिकता है। इन नियमों का पालन करना न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है, बल्कि जीवन सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।” — प्रशासन, एम्स ऋषिकेश
संस्थान ने सभी कर्मचारियों, छात्रों और आगंतुकों से अपील की है कि वे चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग करें और किसी भी प्रकार की बहस से बचें। मुख्य गेट पर इस संबंध में नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं ताकि कोई भी अनभिज्ञता का बहाना न बना सके।

