
ऋषिकेश। योग नगरी ऋषिकेश के पौराणिक वीरभद्र महादेव मंदिर परिसर में नवनिर्माण के लिए की जा रही खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्तियाँ मिलने से क्षेत्र में कौतूहल और श्रद्धा का माहौल है। सूचना मिलते ही देहरादून से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने मौके पर पहुँचकर मूर्तियों का निरीक्षण किया। प्राथमिक जाँच के बाद विशेषज्ञों ने इन मूर्तियों के 15वीं सदी के होने का दावा किया है।
नवनिर्माण के दौरान खुला सदियों पुराना राज
जानकारी के अनुसार, बीते दिनों मंदिर परिसर में चल रहे खुदाई कार्य के दौरान अचानक कुछ प्राचीन मूर्तियाँ बरामद हुईं। मंदिर प्रबंधन ने तत्परता दिखाते हुए इन बेशकीमती मूर्तियों को सुरक्षित किया और तुरंत स्थानीय प्रशासन व पुरातत्व विभाग को इसकी सूचना दी।
शनिवार को पुरातत्व विभाग की टीम डॉ. एमसी जोशी के नेतृत्व में मंदिर परिसर पहुँची और मूर्तियों की बारीकी से जाँच की।
विरासत को सहेजने की कवायद
जाँच टीम के सदस्य डॉ. एमसी जोशी ने बताया:
“प्रथम दृष्टया ये मूर्तियाँ 15वीं शताब्दी की प्रतीत हो रही हैं। ये भारत की अनमोल धरोहर हैं और इन्हें संरक्षित करना हमारी प्राथमिकता है। फिलहाल मंदिर प्रबंधन के अनुरोध पर इन मूर्तियों को मंदिर परिसर में ही सुरक्षित रूप से स्थापित (Curation) कर दिया गया है, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकें।”
आगामी रणनीति और सर्वे
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले से
उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। आगामी दिशा-निर्देशों के आधार पर पुरातत्व विभाग की टीम क्षेत्र में विस्तृत सर्वे भी कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या जमीन के नीचे और भी प्राचीन अवशेष दबे हुए हैं।
इस खोज ने इतिहासकारों और स्थानीय निवासियों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। बड़ा सवाल यह है कि सदियों से ये मूर्तियाँ जमीन के भीतर दबी रहीं और किसी को भनक तक नहीं लगी। अब खुदाई के जरिए सामने आई इन मूर्तियों से वीरभद्र क्षेत्र के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

