ऋषिकेश: देवभूमि की हृदयस्थली और आस्था के केंद्र ऋषिकेश में एक बार फिर मां गंगा की पवित्रता को ठेस पहुंचाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने ‘सनातनी’ परंपराओं का दावा करने वालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में स्पर्श गंगा अभियान के जिला कोऑर्डिनेटर और सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता जॉनी लांबा ने एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में त्रिवेणी घाट की पवित्र जलधारा में कुछ महिला और पुरुष श्रद्धालु सरेआम चप्पल पहनकर प्रवेश करते नजर आ रहे हैं। विडंबना यह है कि कुछ लोग हाथों में पूजा का सामान, फूल और अगरबत्ती का दौना लिए हुए थे, लेकिन उनके पैरों में चप्पलें मौजूद थीं।
जागरूकता फैलाने की कोशिश
जॉनी लांबा ने वीडियो साझा करते हुए उन लोगों को ‘आईना’ दिखाने का प्रयास किया है जो खुद को सनातनी तो कहते हैं, लेकिन धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना भूल जाते हैं। उन्होंने बताया:
”वीडियो वायरल करने का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। मां गंगा की पवित्रता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आस्था के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।”
संस्थाओं और व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद तीर्थनगरी में सक्रिय विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ भी आक्रोश देखा जा रहा है। राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र भटनागर ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि:
- धर्म के नाम पर सक्रिय कुछ संस्थाएं और ‘ठेकेदार’ इन गलतियों पर मौन साधे हुए हैं।
- कई संस्थाएं मां गंगा के नाम पर चंदा तो एकत्र कर रही हैं, लेकिन धरातल पर मर्यादा की रक्षा करने में विफल साबित हो रही हैं।
- सरकार और प्रशासन को इस दिशा में कड़े कदम उठाने की जरूरत है ताकि तीर्थ की गरिमा बनी रहे।
निष्कर्ष
त्रिवेणी घाट जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर जहां देश-दुनिया से लोग श्रद्धा भाव से आते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। स्पर्श गंगा अभियान की टीम ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि श्रद्धालु स्वयं जागरूक नहीं हुए, तो आने वाले समय में गंगा की मर्यादा को बचाना कठिन हो जाएगा।

