

Rishikesh: नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक क्षेत्र में अब रेहड़ी-ठेली संचालन को व्यवस्थित करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय निकाय ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में लाइसेंस केवल क्षेत्र के वास्तविक जरूरतमंद और स्थानीय लोगों को ही दिए जाएंगे। इसके लिए पहले से जारी लाइसेंसों की गहन छंटनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि पात्र और अपात्र की सही पहचान हो सके। छंटनी पूरी होने के बाद ही नए सिरे से लाइसेंसों का वितरण किया जाएगा।

यह क्षेत्र सालभर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों से गुलजार रहता है। खासकर चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और कुंभ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इसी वजह से लक्ष्मणझूला-स्वर्गाश्रम जौंक क्षेत्र में बड़ी संख्या में रेहड़ी-ठेली संचालित होने लगी हैं, जिससे धीरे-धीरे अतिक्रमण की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।
गंगा चौक से लेकर लक्ष्मीनारायण घाट, गीताभवन, भारत साधु समाज, परमार्थ निकेतन, वानप्रस्थ आश्रम, जानकी सेतु और आसपास के कई प्रमुख स्थानों पर सड़कों के दोनों ओर रेहड़ी-ठेली का फैलाव देखा जा सकता है। संकरी सड़कों पर इस बढ़ते अतिक्रमण के कारण वाहनों और पैदल चलने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर तो हालात ऐसे हो गए हैं कि आवाजाही तक प्रभावित होने लगी है।
निकाय द्वारा पहले लगभग 180 जरूरतमंद लोगों को लाइसेंस जारी किए गए थे, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़कर सैकड़ों में पहुंच गई। अब स्थिति को नियंत्रित करने और क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। छंटनी के बाद जहां पात्र लोगों को ही लाइसेंस दिए जाएंगे, वहीं अवैध रूप से संचालित हो रही रेहड़ी-ठेलियों को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
निकाय का मानना है कि इस पहल से न केवल स्थानीय जरूरतमंदों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि क्षेत्र में यातायात व्यवस्था भी सुधरेगी और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम क्षेत्र में व्यवस्था बहाल करने और अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।







