नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवा चिकित्सकों को सेवा और समर्पण का मंत्र दिया। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा की उपाधि केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के प्रति एक गंभीर उत्तरदायित्व का आगाज़ है।
समारोह की मुख्य बातें:
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निष्ठा और सेवा का आह्वान: उपराष्ट्रपति ने स्नातक हुए डॉक्टरों से अपील की कि वे अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सा के पेशे में सेवा की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए।
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सार्वजनिक धरोहर के रूप में स्वास्थ्य सेवा: उन्होंने रेखांकित किया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक धरोहर है। इस पर देश के हर नागरिक का समान अधिकार है और डॉक्टरों का यह कर्तव्य है कि वे इस अधिकार की रक्षा करें।
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समाज के प्रति जवाबदेही: उपराष्ट्रपति के अनुसार, संस्थान से मिली शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी सिद्ध होगा जब इसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।
युवा डॉक्टरों के लिए संदेश
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ ही यह उम्मीदें भी बढ़ती हैं कि ये युवा डॉक्टर भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक समावेशी और मानवीय बनाएंगे।
“उपाधि प्राप्त करना आपकी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि देश सेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत है।”
इस दीक्षांत समारोह में संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में स्नातक छात्र व उनके परिजन उपस्थित रहे। स्नातकों के चेहरों पर अपनी उपलब्धि की खुशी के साथ-साथ देश की सेवा करने का संकल्प भी साफ झलक रहा था।

