ऋषिकेश। चारधाम यात्रा के आगाज़ के साथ ही तीर्थनगरी ऋषिकेश की सड़कों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रशासन की नींद टूट गई है। नगर निगम, पुलिस और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने शहर के मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। हालांकि, इस कार्रवाई में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं, क्योंकि टीम का पूरा ज़ोर केवल रेहड़ी-पटरी वालों पर ही दिखाई दिया।
भारी लाव-लश्कर के साथ सड़कों पर उतरी टीम
नगर निगम कार्यालय से तहसीलदार प्रदीप नेगी के नेतृत्व में निकली टीम ने बस अड्डा रोड, चंद्रभागा पुल, लाजपत राय रोड, मुखर्जी मार्ग और घाट चौक जैसे व्यस्त इलाकों में कार्रवाई की। इस दौरान सड़कों के किनारे ठेली लगाने वालों में हड़कंप मचा रहा। नगर निगम की टीम ने कई स्थानों पर सामान ज़ब्त किया और दोबारा अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी।
एकतरफा कार्रवाई से उपजा असंतोष
करीब तीन घंटे तक चले इस अभियान के दौरान प्रशासन की कार्रवाई में दोहरा मापदंड देखने को मिला। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि:
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नो-पार्किंग की अनदेखी: सड़कों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों के कारण सबसे ज्यादा जाम लगता है, लेकिन प्रशासन ने उन्हें हटाने की जहमत तक नहीं उठाई।
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पक्के अतिक्रमण पर चुप्पी: नालियों के ऊपर किए गए पक्के अतिक्रमण पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
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सिर्फ गरीबों पर वार: अभियान का मुख्य निशाना केवल छोटे ठेली-रेहड़ी वाले ही रहे, जबकि बड़े अतिक्रमणकारी सुरक्षित नज़र आए।
प्रशासन का पक्ष: जारी रहेगी कार्रवाई
प्रशासन का तर्क है कि चारधाम यात्रा के चलते श्रद्धालुओं को पैदल चलने में असुविधा न हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है। तहसीलदार प्रदीप नेगी ने बताया कि:
“फिलहाल लोगों को खुद ही अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। जिन स्थानों पर आज कार्रवाई नहीं हो पाई है, वहां जल्द ही एक्शन लिया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।”
देर से ही सही, प्रशासन की सक्रियता स्वागत योग्य है, लेकिन यदि शहर को जाम मुक्त करना है, तो प्रशासन को ‘पिक एंड चूज’ की नीति छोड़कर समान रूप से सभी अतिक्रमणकारियों और अवैध पार्किंग पर शिकंजा कसना होगा।

