ऋषिकेश। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तीर्थनगरी ऋषिकेश में इन दिनों अतिक्रमण की समस्या एक विकराल महामारी का रूप ले चुकी है। प्रशासन की निरंतर अनदेखी और लापरवाही के कारण शहर की मुख्य सड़कों पर अतिक्रमणकारियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब पैदल यात्रियों के लिए भी राह सुरक्षित नहीं रह गई है।
इन क्षेत्रों में स्थिति सबसे भयावह
शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले सबसे व्यस्त इलाकों में अतिक्रमण ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है:
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त्रिवेणी घाट रोड: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वाले इस मार्ग पर चलना मुश्किल हो गया है।
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मुखर्जी चौक: व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र में अव्यवस्था का बोलबाला है।
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रेलवे रोड: यहाँ वाहनों और पैदल यात्रियों के बीच हर समय संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।
दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों का ‘सड़क पर कब्जा’
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दुकानदारों ने अपनी दुकानों का सामान सड़कों तक फैला दिया है, वहीं रेहड़ी-पटरी वालों ने भी बचे-कुचे फुटपाथों पर कब्जा जमा लिया है। इस कारण:
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दुर्घटना का भय: फुटपाथ न मिलने के कारण स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को मजबूरी में सड़क के बीच से गुजरना पड़ता है।
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जाम की समस्या: वाहनों के निकलने के लिए जगह कम होने से यहाँ घंटों लंबा जाम लगना अब नियति बन चुकी है।
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पर्यटन पर असर: ऋषिकेश आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को इस अव्यवस्था के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे शहर की छवि धूमिल हो रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद नगर निगम और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि जिम्मेदारों की उदासीनता और ढुलमुल रवैये के कारण ही अतिक्रमणकारी निडर होकर सड़कों को घेर रहे हैं।
“यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में ऋषिकेश की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। हमें जल्द से जल्द सघन अभियान और सख्त कानूनी कार्रवाई की दरकार है।” — स्थानीय निवासी
अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन गहरी नींद से जागकर इन क्षेत्रों में कोई प्रभावी अभियान चलाता है या फिर जनता इसी तरह अव्यवस्था और हादसों के साये में जीने को मजबूर रहेगी।

