देहरादून: राजधानी के प्रतिष्ठित दून अस्पताल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। अस्पताल की गायनी इमरजेंसी के बाहर मरीज के तीमारदारों और सुरक्षा कर्मियों के बीच मामूली बात पर शुरू हुई नोकझोंक देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। तीमारदारों पर महिला सुरक्षा कर्मियों और वार्ड आया के साथ बेरहमी से लात-घूंसे चलाने और जानलेवा हमला करने का आरोप है। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को अस्पताल के पास से दबोचकर चौकी में बैठा दिया।

इस वजह से शुरू हुआ विवाद जानकारी के मुताबिक, रविवार तड़के करीब तीन बजे परिजन एक 16 वर्षीय किशोरी को पेट दर्द की शिकायत होने पर दून अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने मरीज को गायनी (महिला रोग) विभाग की इमरजेंसी में रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि परिजनों ने सबसे पहले वहां किए जाने वाले यूपीटी (यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट) की जांच पर आपत्ति जताई, जिस पर डॉक्टरों ने साफ किया कि यह अस्पताल के तय प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
इसके बाद विवाद तब और बढ़ गया जब तीमारदारों ने आरोप लगाया कि मरीज के खून के आठ वायल (सैंपल) ले लिए गए। परिजनों का कहना है कि जब वे नीचे काउंटर पर गए, तो वहां के कर्मचारियों ने ही उनसे कह दिया कि महज दो जांचों के लिए इतना खून क्यों निकाला गया। इस बात से भड़के परिजन दोबारा ऊपरी मंजिल पर पहुंचे और डॉक्टरों व स्टाफ का विरोध करने लगे।
महिला कर्मियों को बेरहमी से पीटा, वॉकी-टॉकी छीनी विरोध ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि तीमारदारों ने वहां मौजूद महिला सुरक्षा कर्मी कविता के सिर पर कांच की बोतल दे मारी, जिससे वह लहूलुहान हो गईं। इसके बाद उन्होंने वार्ड आया दीपा के पेट पर भी लात मारी। जब बीच-बचाव करने पुरुष सुरक्षा गार्ड हरेंद्र और रमेश आगे आए, तो हमलावरों ने उनके साथ भी मारपीट की और उनकी ही वॉकी-टॉकी छीनकर उनके सिर पर दे मारी।

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी अस्पताल परिसर में तड़के हुए इस अप्रत्याशित हंगामे और मारपीट से डॉक्टरों व स्टाफ में हड़कंप मच गया। घटना के तुरंत बाद आरोपी मौके से भागने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें दून अस्पताल के पास ही धर दबोचा। फिलहाल सभी आरोपियों को पुलिस चौकी में बैठाकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा कर्मियों पर हुए इस हमले के बाद अस्पताल स्टाफ में भारी आक्रोश है।

