सूतक काल और समय का गणित

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। चूंकि ग्रहण दोपहर में शुरू हो रहा है, इसलिए सूतक का प्रभाव सुबह से ही देखने को मिल रहा है।

कार्यक्रम समय
सूतक काल प्रारंभ सुबह 06:27 बजे
चंद्रग्रहण प्रारंभ दोपहर 03:27 बजे
चंद्रग्रहण समापन शाम 06:57 बजे

धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव

इस बार का चंद्रग्रहण विशेष रूप से सिंह राशि को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। मघा नक्षत्र में ग्रहण लगने के कारण पितृ दोष और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां ज्योतिषीय गणनाओं में बताई जा रही हैं।

  • मंदिरों में प्रवेश वर्जित: सूतक काल लगते ही सुबह 6:27 बजे से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए हैं। अब शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके बाद ही श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।

  • क्या करें, क्या न करें: सूतक के दौरान पूजा-पाठ वर्जित होता है, हालांकि इस अवधि में मंत्रों का जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

ग्रहण के बाद का शुद्धिकरण

शाम 6:57 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद लोग गंगा स्नान या घर में ही पवित्र जल छिड़क कर शुद्धिकरण करेंगे। इसके बाद दान-पुण्य का विधान है, जिससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।

नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और आपकी दी गई डिटेल्स पर आधारित है। व्यक्तिगत सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।