उत्तराखंड अब सिर्फ धार्मिक पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि रोमांचक खेलों (एडवेंचर स्पोर्ट्स) के लिए भी देश का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। यहां पैराग्लाइडिंग, पैरा-मोटरिंग और जायरोकॉप्टर जैसे एयरो स्पोर्ट्स को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जल्द ही एक खास नियमावली तैयार करेगा। इस नियमावली का मकसद यह होगा कि एयरो स्पोर्ट्स को सुरक्षित ढंग से चलाया जाए और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हाल ही में नई दिल्ली में DGCA की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें उत्तराखंड में एयरो स्पोर्ट्स की प्रगति पर चर्चा की गई। इस बैठक में उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने अपनी योजना पेश की। इसके बाद DGCA ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभागों और निजी संचालकों की बैठक बुलाकर भविष्य की रणनीति बनाई जाए।
राज्य सरकार ने एयरो स्पोर्ट्स को अपनी “गेम चेंजर” योजनाओं में शामिल किया है। फिलहाल उत्तराखंड के कई स्थानों पर ये गतिविधियां चल रही हैं, जैसे –
देहरादून का मालदेवता
टिहरी झील (कोटी कॉलोनी)
मुक्तेश्वर
रानीखेत
मसूरी
शिवपुरी (ऋषिकेश)
टनकपुर
इन जगहों पर पैराग्लाइडिंग, पैरा-मोटरिंग, हैंग ग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलूनिंग और फ्लाइंग फॉक्स जैसी गतिविधियां होती हैं। अब पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जायरोकॉप्टर और फ्री फॉल जैसी नई गतिविधियां भी शुरू की जा रही हैं।
नियमावली से बढ़ेगी सुरक्षा और पारदर्शिता
अभी राज्य में कई जगह निजी कंपनियों के जरिए एयरो स्पोर्ट्स चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनके लिए कोई एक समान नियम नहीं हैं। इस वजह से सुरक्षा को लेकर समस्याएं हो सकती हैं। DGCA ने इस पर सख्ती दिखाई है और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विभाग को जरूरी नियम बनाने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही नई दिल्ली में होने वाली अगली बैठक में इस नियमावली का अंतिम रूप तय किया जाएगा। इससे सभी एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियां सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से संचालित होंगी।
अधिकारियों का बयान
यूसीएडीए के सीईओ डॉ. आशीष चौहान ने कहा, “उत्तराखंड तेजी से एक बड़ा एडवेंचर टूरिज्म केंद्र बन रहा है। यहां पैराग्लाइडिंग, पैरा-मोटरिंग, हैंग ग्लाइडिंग और हॉट एयर बैलूनिंग जैसी गतिविधियां बढ़ रही हैं। इन्हें सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए नियमावली बनाई जा रही है।”

