

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की बैठक में एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। समिति का कहना है कि यह कदम मंदिरों की धार्मिक परंपराओं, आस्था और पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
समिति के अनुसार बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित बीकेटीसी के अधीन आने वाले कुल 47 मंदिरों में यह व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इन मंदिरों में दर्शन के लिए वही लोग आएं, जिनकी सनातन धर्म में आस्था हो और जो इन धार्मिक स्थलों की मर्यादा और परंपराओं का सम्मान करते हों।
इस निर्णय पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से लिया गया यह प्रस्ताव अभी सरकार के पास औपचारिक रूप से नहीं पहुंचा है। जब यह प्रस्ताव सरकार के समक्ष आएगा तो संबंधित अधिनियम और नियमों के तहत उसका परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के किसी भी विषय पर निर्णय लेने से पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बीकेटीसी की बैठक में चारधाम यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आगामी यात्रा सीजन को देखते हुए मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने, व्यवस्थाओं को मजबूत करने और तीर्थ क्षेत्र के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसके साथ ही तीर्थ पुरोहितों के सामाजिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए ‘तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष’ बनाने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें सहायता प्रदान की जा सके।
बैठक में चारधाम यात्रा के लिए बजट को भी मंजूरी दी गई और यात्रा को सुचारु, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर चर्चा की गई। प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि यात्रा के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और धार्मिक परंपराओं का भी पूरी तरह पालन हो।







