

मसूरी: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब उत्तराखंड तक दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल, ढाबा और उद्योगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की कमी के कारण पर्यटन नगरी मसूरी में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं, जहां कई होटलों को अपने किचन बंद करने तक की नौबत आ गई है। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो पर्यटन कारोबार पयर बड़ा असर पड़ सकता है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संकट के चलते गैस की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसके चलते कई स्थानों पर कॉमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की सप्लाई बाधित हो गई है। उत्तराखंड में हरिद्वार, देहरादून और कुमाऊं क्षेत्र के कई जिलों में व्यावसायिक सिलिंडरों की कमी देखी जा रही है, जिससे होटल व्यवसाय और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ गया है।
हरिद्वार में इंडियन ऑयल के बहादराबाद प्लांट, बीपीसीएल के लंढौरा प्लांट और एचपी गैस के भगवानपुर प्लांट से कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। सोमवार और मंगलवार को कई गैस एजेंसियों तक सिलिंडर नहीं पहुंचे, जिससे सिडकुल और बहादराबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज पर असर पड़ने लगा है। यहां करीब सात हजार व्यावसायिक गैस कनेक्शन हैं और हर महीने लगभग 500 टन एलपीजी उद्योगों को उपलब्ध कराई जाती है। आपूर्ति बाधित होने से उद्योगों के सामने भी संकट खड़ा होने लगा है।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी गैस की कमी की स्थिति बनती दिख रही है। सितारगंज सिडकुल की करीब दर्जनभर कंपनियों के पास सीमित गैस स्टॉक बचा है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। राजधानी देहरादून में भी गैस की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है। यहां प्रतिदिन लगभग 18 हजार घरेलू गैस सिलिंडरों की जरूरत होती है, जबकि मौजूदा समय में करीब 12 हजार सिलिंडर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं।
कुमाऊं क्षेत्र के कई शहरों में भी स्थिति चिंताजनक हो गई है। रुद्रपुर में लगभग 850 और काशीपुर में करीब 1600 सिलिंडरों का बैकलॉग हो चुका है। हल्द्वानी, रामनगर, अल्मोड़ा और चंपावत में भी व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गैस की कमी की आशंका के बीच लोगों में भी चिंता बढ़ने लगी है। कई गैस एजेंसियों में कॉमर्शियल सिलिंडरों का स्टॉक खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है, जबकि घरेलू सिलिंडरों की आपूर्ति भी धीमी हो गई है। एजेंसियों ने फिलहाल होटलों और ढाबों को सिलिंडर देने पर रोक लगा दी है और अस्पतालों तथा स्कूलों जैसे जरूरी संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। देहरादून में घरेलू गैस सिलिंडरों का बैकलॉग करीब 30 हजार तक पहुंच गया है और कई उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद सात से दस दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
पर्यटन नगरी मसूरी में गैस संकट का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। यहां पिछले तीन दिनों से कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की सप्लाई लगभग ठप है, जबकि घरेलू गैस भी सीमित मात्रा में मिल रही है। मसूरी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अग्रवाल के अनुसार गैस की कमी के चलते कई होटलों के किचन बंद करने पड़े हैं और कुछ होटलों के पास केवल एक-दो दिन का ही गैस स्टॉक बचा है। यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो पर्यटन कारोबार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
स्थिति को देखते हुए सरकार ने एलपीजी और सीएनजी की जमाखोरी तथा कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सभी जिलाधिकारियों को गैस की उपलब्धता और वितरण की लगातार निगरानी करने को कहा गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी न होने पाए और जरूरतमंद क्षेत्रों में समय पर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।







