देहरादून/ऋषिकेश: ऋषिकेश के बापू ग्राम में पिछले कई महीनों से सुलग रहा वन भूमि प्रकरण अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। गुरुवार को ‘बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारी अपनी आवाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुँचाने के लिए देहरादून कूच पर निकले। हालांकि, रास्ते में पुलिस प्रशासन के साथ हुई खींचतान और बैरिकेडिंग तोड़े जाने की घटनाओं ने माहौल को और गरमा दिया है।
सड़क पर संग्राम: पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने
बापू ग्राम के निवासियों का जत्था जैसे ही देहरादून की ओर बढ़ा, पुलिस ने बापू ग्राम रोड पर भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। प्रशासन का तर्क था कि प्रदर्शनकारियों के पास प्रधानमंत्री से मिलने या इस प्रकार के जुलूस की अनुमति नहीं है।
पुलिस द्वारा रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और मुख्य हाईवे पर जा पहुँचे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और नोकझोंक चलती रही। जब स्थिति अनियंत्रित होने लगी, तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें तहसील परिसर ले गई।
ज्ञापन के जरिए पीएम तक पहुँचाई गुहार
तहसील पहुँचने के बाद संघर्ष समिति ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। अंततः प्रदर्शनकारियों ने तहसील प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। अपनी मांगों को कागजों के जरिए दिल्ली तक पहुँचाने के बाद लोग वापस लौट गए, लेकिन उनके मन में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा असंतोष दिखा।
3 महीने से जारी है धरना: क्या है मुख्य मांग?
मौके पर मौजूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयेंद्र रमोला और स्वाभिमान मोर्चा के सुधीर राय ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया। उनके अनुसार:
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बापू ग्राम के लोग पिछले 3 महीनों से लगातार धरने पर बैठे हैं।
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वन भूमि प्रकरण में सरकार अभी तक किसी स्थाई निष्कर्ष पर नहीं पहुँची है।
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प्रभावित लोगों को अब तक प्रशासन या सरकार से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
“प्रशासन की हठधर्मिता और गंभीर चेतावनी”

आंदोलनकारियों का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने कहा कि देश के सर्वोच्च नागरिक (प्रधानमंत्री) से मिलने से रोकना प्रशासन की हठधर्मिता है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रधानमंत्री ने इस संवेदनशील मामले का स्वतः संज्ञान लेकर कोई उचित समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ऋषिकेश का बापू ग्राम प्रकरण अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रह गया है। लोगों की आजीविका और उनके आशियाने से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी ने जन-आक्रोश को और बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक ज्ञापन पहुँचने के बाद केंद्र या राज्य सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।

