ऋषिकेश। एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड सोसाइटी घोटाले में फंसी उत्तराखंड के लाखों निवेशकों की मेहनत की कमाई की वापसी के लिए संघर्ष तेज़ हो गया है। आवेदन पत्रों के सत्यापन (अटेस्टेशन) में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के विरोध में ‘उत्तराखंड जन विकास मंच’ के बैनर तले ऋषिकेश तहसील परिसर में दो घंटे का सांकेतिक धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पीड़ित निवेशकों ने हिस्सा लिया, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं।
जटिल प्रक्रिया और धीमी रफ्तार से बढ़ता संकट
उत्तराखंड जन विकास मंच के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने धरने को संबोधित करते हुए बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर धनवापसी के लिए लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है और फॉर्म भरे जा रहे हैं। लेकिन आवेदन की प्रक्रिया इतनी जटिल बनाई गई है कि आम निवेशकों से फॉर्म भरने में लगातार गलतियां हो रही हैं।
सबसे बड़ी समस्या आवेदन पत्र को राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) से अटेस्ट कराने की अनिवार्यता को लेकर आ रही है। अधिकारियों की कमी और सुस्त रफ्तार के कारण प्रतिदिन केवल 40 से 50 फॉर्म ही अटेस्ट हो पा रहे हैं। इस धीमी गति से समय सीमा समाप्त होने का डर सता रहा है, जिससे हजारों पीड़ितों का पैसा हमेशा के लिए डूबने की आशंका बन गई है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावित क्षेत्र: अकेले ऋषिकेश तहसील क्षेत्र में लगभग 20,000 निवेशक प्रभावित हैं।
प्रदेश स्तर का आंकड़ा: पूरे उत्तराखंड में 1.60 लाख से अधिक पीड़ित हैं, जिनमें लगभग 90% महिलाएं शामिल हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा: 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र भेजने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जन विकास मंच की प्रमुख मांगें
मंच ने प्रशासन से मांग की है कि अटेस्टेशन की प्रक्रिया को तुरंत सरल बनाया जाए। केवल तहसील स्तर पर निर्भर रहने के बजाय ऋषिकेश, हरिपुर कलां और रायवाला जैसे क्षेत्रों में विशेष शिविर (Special Camps) लगाए जाएं और राजपत्रित अधिकारियों की टीमें तैनात कर जल्द से जल्द सत्यापन पूरा किया जाए।
न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी
मंच के पदाधिकारियों और पीड़ितों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने जल्द ही आसान व पारदर्शी व्यवस्था तैयार नहीं की, तो राज्य के लाखों ठगे गए पीड़ितों को न्याय के लिए एक बार फिर न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

