रोशनाबाद (हरिद्वार)। रोशनाबाद स्थित पुलिस कार्यालय के सभागार में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह की अध्यक्षता में माह अगस्त की अपराध समीक्षा गोष्ठी आयोजित की गई। सैनिक सम्मेलन के बाद आयोजित इस बैठक में जनपद के सभी राजपत्रित पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी और शाखा प्रभारी शामिल हुए। इस अवसर पर एसपी क्राइम निशा यादव, एसपी देहात अभय सिंह तथा एसपी सिटी दीपक सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

गोष्ठी के दौरान कप्तान नवनीत सिंह ने जनपद में पिछले माह हुए अपराधों, मुकदमों के अनावरण, चल रहे अभियानों और लंबित विवेचनाओं की बिंदुवार समीक्षा की। जिन प्रभारियों के थानों में विवेचनाएं और शिकायती पत्र पेंडिंग (लंबित) हैं, उन्हें कड़ी हिदायत देते हुए निश्चित समयावधि में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में दिए गए मुख्य 12 दिशा-निर्देश:
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पारदर्शी और गुण-दोष आधारित विवेचना: सभी क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी मुकदमों (BNS/IPC) में पारदर्शी विवेचना सुनिश्चित करेंगे। क्षेत्राधिकारी लंबित मामलों की समीक्षा (OR) कर गुणवत्ता के आधार पर उनका निस्तारण करवाएं। काम में लापरवाही बरतने वाले विवेचकों की रिपोर्ट कप्तान कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए।
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मानवाधिकार एवं प्रारंभिक जांचों का निस्तारण: थानों और मानवाधिकार आयोग से संबंधित लंबित जांचों की पर्यवेक्षण अधिकारी समीक्षा करें और शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित कराएं।
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60/90 दिन की समयसीमा का पालन: जिन मामलों में चार्जशीट/अंतिम रिपोर्ट के लिए 60 या 90 दिन की कानूनी सीमा तय है, उन्हें समय पर पूरा किया जाए। एसपी सिटी और एसपी देहात इसकी साप्ताहिक समीक्षा करेंगे।
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ऑनलाइन शिकायतों का त्वरित निस्तारण: पुलिस मुख्यालय से ऑनलाइन पोर्टल के जरिए प्राप्त होने वाली जनशिकायतों पर तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई की जाए।
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पुराने माल-मुकदमों का निस्तारण: थानों में लंबे समय से लंबित माल (मालखाने में दर्ज सामान) की समीक्षा कर रिपोर्ट क्षेत्राधिकारी के माध्यम से प्रेषित की जाए, ताकि आवश्यक पत्राचार कर उनका निस्तारण हो सके।
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अज्ञात शवों की शिनाख्त के प्रयास: सीमावर्ती जिलों व राज्यों से समन्वय स्थापित कर अज्ञात शवों का डेटा जुटाया जाए और डीसीआरबी (DCRB) को उपलब्ध कराया जाए, ताकि परिजनों तक सूचना पहुंच सके।
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त्योहारों को लेकर बाजारों और बैंकों में सुरक्षा: आगामी त्यौहारी सीजन को देखते हुए बाजारों, सर्राफा दुकानों और बैंकों में सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। व्यापारियों से सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी चालू रखने पर वार्ता की जाए।
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आगंतुकों से मधुर व्यवहार और महिला स्टाफ: थानों में आने वाले आम नागरिकों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार किया जाए। महिला पीड़ितों की बात सुनने और मदद के लिए महिला उपनिरीक्षक या महिला कर्मी की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
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डिजिटल शिकायतों को गंभीरता से लेना: भौतिक रूप से थाने न पहुंच पाने वाले पीड़ितों की ऑनलाइन शिकायतों पर त्वरित व गंभीर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
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नाइट गश्त व चेकिंग: सायं के समय सभी थाना प्रभारी क्षेत्र में राउंड पर रहेंगे, जिसकी मॉनिटरिंग एसपी सिटी/देहात करेंगे। साथ ही रात्रि गश्त की टीमों को ब्रीफ करके ही ड्यूटी पर रवाना करने के निर्देश दिए गए।
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वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जोर: गंभीर मामलों में कोर्ट में चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने से पहले वैज्ञानिक साक्ष्यों (Scientific Evidence) का बारीकी से अध्ययन करना अनिवार्य किया गया है।
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निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता पर नजर: जनपद में जिन थानों या पुलिस कार्यालयों के नए भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है, वहां गुणवत्ता की निगरानी के लिए एक कर्मी तैनात करने के निर्देश दिए गए। निर्माण में खामी पाए जाने पर संबंधित थाना प्रभारी जवाबदेह होंगे।

