


ऋषिकेश: आवास विकास स्थित स्वामी नित्यानंद सरस्वती शिशु मंदिर में ‘शिशु वाटिका’ का वार्षिक उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में नन्हें-मुन्ने बच्चों की प्रतिभा और विद्यालय की अभिनव शिक्षण पद्धति मुख्य आकर्षण का केंद्र रही।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने विद्यालय की प्रधानाचार्य पूनम अनेजा के साथ मिलकर दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर देशभक्ति और उल्लास के रंगों में सराबोर नजर आया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
शिशु वाटिका के छोटे-छोटे बच्चों ने मंच पर अपनी मासूमियत और कला का ऐसा प्रदर्शन किया कि उपस्थित अभिभावक और अतिथि मंत्रमुग्ध हो गए।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: बच्चों ने लोक नृत्य और गीतों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की झलक पेश की।
- देशभक्ति का जोश: देशभक्ति पर आधारित प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में समां बांध दिया, जिसे दर्शकों की खूब सराहना मिली।
‘बैगलेस’ (बस्ता मुक्त) पढ़ाई की प्रशंसा

मुख्य अतिथि कुसुम कंडवाल ने विद्यालय के आधुनिक शैक्षिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा:
”आज के दौर में बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करना एक बड़ी चुनौती है। स्वामी नित्यानंद सरस्वती शिशु मंदिर ने ‘बस्ता मुक्त’ (Bagless) पढ़ाई का जो अभियान शुरू किया है, वह काबिले तारीफ है। यह बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।”
बच्चों की मासूमियत और क्रियाशीलता पर जोर
प्रधानाचार्य पूनम अनेजा ने कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि विद्यालय का लक्ष्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें क्रियाशील बनाना है। उन्होंने कहा कि ‘बस्ता मुक्त’ शिक्षा पद्धति का उद्देश्य बच्चों के बचपन और उनकी मासूमियत को बचाए रखना है, ताकि वे खेल-खेल में जीवन के महत्वपूर्ण कौशल सीख सकें।
मुख्य उपस्थिति: कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक, भारी संख्या में अभिभावक और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।







