देहरादून: उत्तराखंड के उन हजारों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है जिनके बच्चे पढ़ाई या रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्यों या विदेशों में रह रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान घर पर अनुपस्थित पाए जाने पर भी ऐसे युवाओं के नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जाएंगे।
प्रवासियों के लिए ‘सुरक्षा कवच’
अक्सर मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision) के दौरान घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है। इस प्रक्रिया में यदि कोई सदस्य लंबे समय से घर पर नहीं मिलता, तो ‘अनुपस्थित’ मानकर उनका नाम काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती थी। लेकिन नई व्यवस्था के तहत:
- शिक्षा और रोजगार को आधार: यदि परिवार का कोई सदस्य बाहर पढ़ रहा है या नौकरी कर रहा है, तो उसे ‘अस्थायी रूप से अनुपस्थित’ माना जाएगा, न कि उस क्षेत्र का गैर-निवासी।
- अभिभावकों का बयान मान्य: सत्यापन के लिए आने वाले बीएलओ (BLO) को यदि परिवार के सदस्य यह जानकारी देते हैं कि उनका बच्चा बाहर है, तो उनके नाम सूची में सुरक्षित रखे जाएंगे।
- विदेश में रह रहे युवाओं को भी लाभ: उच्च शिक्षा या बेहतर करियर के लिए विदेश गए युवाओं का नाम भी उनके पैतृक निवास की मतदाता सूची से नहीं काटा जाएगा।
परिवारों की चिंता होगी दूर
उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जहाँ से बड़ी संख्या में युवा बेहतर भविष्य की तलाश में पलायन करते हैं। चुनाव आयोग के इस कदम से उन अभिभावकों की चिंता दूर होगी जिन्हें डर रहता था कि घर में न होने के कारण उनके बच्चों का वोट कट जाएगा। इससे न केवल प्रवासियों का जुड़ाव अपनी जड़ों से बना रहेगा, बल्कि वे चुनाव के समय अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।
वहीं निर्वाचन आयोग ने पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल अनुपस्थिति के आधार पर नाम न काटें। नाम काटने से पहले पूरी पड़ताल की जाए और परिवार की स्थिति को ध्यान में रखा जाए।

