ऋषिकेश।
उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का औपचारिक आगाज भले ही 18 अप्रैल को ऋषिकेश से होना है, लेकिन भक्ति का उत्साह अभी से चरम पर है। आज ऋषिकेश से सात श्रद्धालुओं का एक जत्था पैदल ही चारों धामों के दर्शन के लिए रवाना हुआ। महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज ने इन श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर और हरी झंडी दिखाकर यात्रा मार्ग के लिए विदा किया।
महाराष्ट्र और कर्नाटक के श्रद्धालुओं का जत्था
इस विशेष जत्थे में कर्नाटक और महाराष्ट्र के श्रद्धालु शामिल हैं, जिनमें चार पुरुष और तीन महिलाएं हैं। इन श्रद्धालुओं की विशेषता यह है कि:
- ये सभी श्रद्धालु पहली बार चारधाम की पैदल यात्रा कर रहे हैं।
- इससे पहले यह दल सफलतापूर्वक नर्मदा परिक्रमा भी पूरी कर चुका है।
- दल का उद्देश्य केवल दर्शन करना ही नहीं, बल्कि यात्रा मार्ग पर मां गंगा की पवित्रता और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है।
सुविधाओं के दौर में कठिन तपस्या
श्रद्धालुओं को विदा करते हुए महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज ने पैदल यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
”आज के दौर में जहां लोग हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर और निजी वाहनों से सुविधाजनक यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं इन श्रद्धालुओं का पैदल यात्रा का संकल्प सराहनीय है। यह प्राचीन परंपरा और कठिन तपस्या का अनूठा उदाहरण है, जो आत्मिक शांति प्रदान करता है।”
पंजीकरण की स्थिति
यात्रा के नियमों के संबंध में श्रद्धालुओं ने बताया कि वर्तमान में दल के एक सदस्य का ऑनलाइन पंजीकरण (Registration) हो चुका है। चूंकि ऑफलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 17 अप्रैल से शुरू होनी है, इसलिए शेष सदस्य रास्ते में ही ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अपना पंजीकरण पूर्ण कराएंगे।
स्वच्छता का संकल्प
पैदल यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। उन्होंने साझा किया कि वे अपनी यात्रा के दौरान मार्ग में मिलने वाले अन्य यात्रियों और स्थानीय लोगों को चारों धामों की गरिमा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करेंगे। उनके अनुसार, पैदल यात्रा करने से प्रकृति और अध्यात्म के साथ गहरा जुड़ाव महसूस होता है।

