चमोली: हिमालय की गोद में लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुण्ड साहिब और पौराणिक श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट आज विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सेना के बैंड की मधुर धुनों, शबद-कीर्तन और अंतिम अरदास के बीच यह पूरा माहौल बेहद भावुक और आध्यात्मिक नजर आया।


रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं ने किए दर्शन इस यात्रा वर्ष के दौरान रिकॉर्ड तोड़ 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम में पहुंचकर मत्था टेका। कपाट बंद होने के पावन अवसर पर गोविंद धाम (घांघरिया) से रागी जत्थों और हजारों श्रद्धालुओं ने हेमकुण्ड साहिब की यात्रा की। इस दौरान पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी विशेष रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। खुशनुमा मौसम और बर्फ से ढकी सप्तश्रृंग घाटी के मनमोहक नजारों ने श्रद्धालुओं को पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में लीन कर दिया।


भावुक माहौल में संपन्न हुए धार्मिक कार्यक्रम कपाट बंद होने के निर्धारित अवसर पर प्रातःकाल सुखमणी साहिब के पाठ से धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद सुबह शबद-कीर्तन हुआ और दोपहर के समय यात्रा की अंतिम अरदास की गई।
अंत में, पावन हुक्मनामा लेकर गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुवाई में तथा सेना के बैंड की मधुर एवं गौरवशाली धुनों के साथ दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। इसी के साथ श्री हेमकुण्ड साहिब और श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट आगामी शीतकाल के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिए गए।

