भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा अनमोल नगीना खो दिया, जिसकी गूंज हमेशा सिल्वर स्क्रीन और दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेगी। नाना पाटेकर का यूं अचानक चले जाना वाकई बेहद दुखद और झकझोर देने वाला है। वह सिर्फ एक मंझे हुए अभिनेता नहीं थे, बल्कि भारतीय कला जगत के एक ऐसे हस्ताक्षर थे जिन्होंने अभिनय को एक नई परिभाषा दी।
नाना पाटेकर के जाने से जुड़ी कुछ खास बातें, जो उन्हें हमेशा हम सबके करीब रखेंगी:
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बेजोड़ अदाकारी और रोंगटे खड़े कर देने वाली शैली: ‘परिंदा’ का खूंखार अन्ना हो, ‘क्रांतिवीर’ का बागी प्रताप, या फिर ‘नटसम्राट’ का दिल चीर देने वाला गजानन बेलवलकर—नाना ने हर किरदार में अपनी ऐसी अमिट छाप छोड़ी, जिसे कोई दूसरा कलाकार कभी नहीं दोहरा सकता। उनके संवाद बोलने का अंदाज और आंखों की तीव्रता सीधे दिल पर असर करती थी।
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दिलदार और जमीन से जुड़े इंसान: परदे पर गुस्से और रुआब से भरे दिखने वाले नाना असल जिंदगी में बेहद सादामजाज, फक्कड़ और दरियादिल इंसान थे। चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया से दूर जमीन से जुड़े रहना और किसानों की भलाई के लिए ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए लगातार काम करना उनकी विशाल शख्सियत को बयां करता है।
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एक युग का अंत: वह उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने कला और कमर्शियल सिनेमा दोनों, दोनों में अपनी धाक जमाई। रंगमंच (थिएटर) से लेकर सिनेमा के शिखर तक का उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा रहेगा।
उनका जाना भारतीय सिनेमा के एक गौरवशाली अध्याय का अंत है। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति दे और उनके परिवार तथा चाहने वालों को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करे।

