हरिद्वार:
उत्तराखंड में ‘कुंभ मेला 2027’ को भव्य, दिव्य और सुरक्षित बनाने की तैयारियां अभी से युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में आज हरिद्वार के मेला नियंत्रण भवन (सीसीआर) में मेलाधिकारी सोनिका की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल परामर्शदात्री बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में हरिद्वार और ऋषिकेश के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और मेला प्रशासन के साथ अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए।
स्थानीय अनुभवों पर टिकी होगी कुंभ की रणनीति
बैठक के दौरान मेलाधिकारी सोनिका ने स्पष्ट किया कि कुंभ मेले का सफल आयोजन स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना अधूरा है। मेला प्रशासन इस बार जमीनी हकीकत और व्यावहारिक अनुभवों को प्राथमिकता दे रहा है।
“स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और धार्मिक संस्थाओं के पास पिछले मेलों का व्यावहारिक अनुभव होता है। उनके सुझावों और फीडबैक को आधार बनाकर ही कुंभ मेला 2027 की अंतिम रणनीति (Final Strategy) तैयार की जाएगी।”
— सोनिका, मेलाधिकारी, कुंभ मेला
करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए अभेद्य सुरक्षा और बेहतर सुविधाएं
मेला प्रशासन का मुख्य फोकस देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को एक सुगम और सुरक्षित माहौल देना है। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई:
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सुगम यातायात और पार्किंग: हरिद्वार और ऋषिकेश में ट्रैफिक जाम की स्थिति से निपटने के लिए नए रूट प्लान और पार्किंग स्थलों पर चर्चा हुई।
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अवस्थापना विकास (Infrastructure): घाटों के सुंदरीकरण, सड़कों की मरम्मत और पेयजल-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को समय से पूरा करने पर जोर दिया गया।
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सुरक्षा व्यवस्था: करोड़ों की भीड़ को देखते हुए आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ नियंत्रण) की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी।
धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने दिखाई एकजुटता
बैठक में आए सामाजिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि समय रहते बैठकों का दौर शुरू होने से काम की गुणवत्ता बेहतर होगी। संगठनों ने भी प्रशासन को हर संभव सहयोग देने का भरोसा जताया है ताकि देवभूमि आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।

