देहरादून: उत्तराखंड में दशकों से वन भूमि, नजूल और सरकारी जमीनों पर बसे हजारों परिवारों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने सदन में घोषणा की है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भूमिधरी अधिकार (मालिकाना हक) देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए सरकार जल्द ही कैबिनेट में एक प्रस्ताव लाएगी, जिसके तहत संबंधित भूखंडों को ‘गैर-आरक्षित वन भूमि’ घोषित किया जाएगा।
सदन में बड़ी घोषणा
बुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान संसदीय कार्य एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की। दरअसल, कांग्रेस ने ‘नियम 58’ के तहत इस ज्वलंत मुद्दे को सदन में उठाया था, जिस पर जवाब देते हुए मंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट किया।
इन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार के इस फैसले से राज्य के कई हिस्सों में सालों से रह रहे लोगों की अनिश्चितता खत्म होगी। मंत्री उनियाल ने विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों का उल्लेख किया:
-
बिंदूखत्ता (लालकुआं)
-
बापूग्राम (ऋषिकेश)
-
नजूल भूमि और अन्य सरकारी भूखंडों पर बसी बस्तियां
“सरकार वन भूमि और नजूल भूमि पर बसे लोगों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। इन भूखंडों को गैर-आरक्षित घोषित कर निवासियों को भूमिधरी अधिकार देने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जा रहा है।” — सुबोध उनियाल, वन मंत्री
क्या होगा बदलाव?
वर्तमान में वन भूमि पर बसे होने के कारण इन लोगों के पास अपनी जमीन के कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, जिससे उन्हें बैंक लोन, सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों में बाधा आती है। ‘गैर-आरक्षित’ घोषित होने के बाद यह जमीन वन विभाग के दायरे से बाहर हो जाएगी, जिससे मालिकाना हक देने का रास्ता साफ हो जाएगा।
विपक्ष का रुख
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था, जिसके बाद सरकार ने यह स्पष्ट आश्वासन दिया है। अब सभी की नजरें आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव पर मुहर लगनी है।

