ऋषिकेश। देशभर में मनाए जा रहे ‘अग्नि शमन सेवा सप्ताह’ के अंतर्गत आज तीर्थनगरी ऋषिकेश में सुरक्षा और सजगता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर अग्निशमन विभाग द्वारा एम्स (AIIMS) ऋषिकेश और राजकीय चिकित्सालय में विशेष प्रशिक्षण शिविर एवं जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य अस्पताल जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को आपदा के समय सुरक्षित बनाना है।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल प्रशिक्षण के दौरान अग्निशमन विशेषज्ञों ने अस्पताल के स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के व्यावहारिक गुर सिखाए। कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित रहीं:
- संसाधनों का उपयोग: अस्पताल कर्मियों को विभिन्न प्रकार की आग (जैसे बिजली, गैस या तरल पदार्थ की आग) पर नियंत्रण पाने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य अग्निशमन उपकरणों के सही इस्तेमाल का प्रदर्शन किया गया।
- सुरक्षित निकास: मॉक ड्रिल के माध्यम से सिखाया गया कि आग लगने की स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को बिना किसी भगदड़ के सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए।
- इम्प्रोवाइज्ड स्ट्रेचर का अभ्यास: आपातकाल में यदि स्ट्रेचर उपलब्ध न हो, तो उपलब्ध संसाधनों जैसे कंबल, चादर या कपड़ों की मदद से तुरंत ‘इम्प्रोवाइज्ड स्ट्रेचर’ बनाने का विशेष अभ्यास कराया गया, ताकि घायलों को बिना देरी के प्राथमिक उपचार मिल सके।
अस्पतालों में सतर्कता अनिवार्य अभियान का नेतृत्व कर रहे एफएसओ (FSO) सुनील दत्त तिवारी ने अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों को सचेत करते हुए बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों में जोखिम अधिक होता है। उन्होंने कहा:
”अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर और बिजली के भारी उपकरणों की अधिकता के कारण आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में कर्मचारियों का मानसिक और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित होना जान-माल की हानि को न्यूनतम करने में निर्णायक साबित होता है।”

