
भारत में कोरियन संस्कृति और कोरियन गेम्स का असर तेजी से बढ़ रहा है। अब इसका एक नकारात्मक रूप भी सामने आने लगा है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। गाजियाबाद की हालिया घटना के बाद डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने बच्चों में बढ़ती गेम और मोबाइल की लत को लेकर चेतावनी दी है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. जया नवानी ने बताया कि कोरियन संस्कृति का प्रभाव कुछ बच्चों और किशोरियों पर बहुत ज्यादा हो रहा है। इसकी वजह से देहरादून में करीब पांच लोग मानसिक समस्या के साथ इलाज के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ किशोरियां अपने माता-पिता से भारत छोड़कर कोरिया जाने की जिद कर रही हैं। वहीं, कुछ मामलों में भारतीय लड़कों के प्रति नफरत की भावना भी पैदा हो रही है।

एक मामले में एक किशोरी कोरियन बॉय बैंड बीटीएस के कार्यक्रम में जाने की जिद कर रही थी। दूसरे मामले में एक युवती ने बताया कि कोरियन सीरियल देखने के बाद वह केवल कोरियन लड़के से ही शादी करना चाहती है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल इसकी सबसे बड़ी वजह है। बार-बार कोरियन गेम, सीरियल और वीडियो देखने से दिमाग में डोपामाइन हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे बच्चे इसके आदी हो जाते हैं।
ब्रेन का कंट्रोल सिस्टम हो रहा कमजोर
एम्स ऋषिकेश के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि कम नींद और ज्यादा स्क्रीन टाइम से दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स प्रभावित हो रहा है। यह हिस्सा हमें सही और गलत का फैसला करने में मदद करता है। जब यह कमजोर होता है तो बच्चे खुद को गलत कदम उठाने से रोक नहीं पाते। उन्होंने कहा कि गेम और ऑनलाइन कंटेंट की लत को “इंपल्सिव डिसऑर्डर” माना जा रहा है। एम्स की ओपीडी में हर सप्ताह ऐसे चार से पांच मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
अभिभावक इन बातों पर ध्यान दें:
1. बच्चे जरूरत से ज्यादा मोबाइल या गेम तो नहीं खेल रहे
2. बच्चों का नाम या पहचान विदेशी भाषा में तो नहीं बदल रही
3. वे दोस्तों या परिवार से कटते तो नहीं जा रहे
4. विदेशी संस्कृति के प्रति अत्यधिक लगाव तो नहीं बढ़ रहा
5. पहनावा, खान-पान और व्यवहार में अचानक बदलाव तो नहीं हो रहा
डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते बच्चों से बातचीत करना, उनके स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग कराना बहुत जरूरी है, ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।

