ऋषिकेश: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के दिशा-निर्देशों पर ऋषिकेश में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर एक बड़ा चेकिंग अभियान चलाया गया। इस सघन कार्रवाई के दौरान शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों से तीन नाबालिग बच्चों को बाल श्रम करते हुए रेस्क्यू किया गया है। प्रशासन ने
मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्चों से मजदूरी करवाने वाले मालिकों के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
संयुक्त टीम ने चलाया सघन चेकिंग अभियान
जानकारी के अनुसार, देहरादून से आई जिला स्तरीय श्रम विभाग की टीम और स्थानीय प्रशासन की टीम ने संयुक्त नेतृत्व में ऋषिकेश के अलग-अलग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में औचक निरीक्षण किया। इस संयुक्त टीम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बाल श्रम को पूरी तरह से समाप्त करना और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को कानूनी नियमों के प्रति सचेत करना था।
इन जगहों से रेस्क्यू किए गए बच्चे
श्रम अधिकारी आनंद सिंह ने बताया कि चेकिंग के दौरान तीन अलग-अलग स्थानों पर नाबालिग बच्चे काम करते हुए पाए गए:
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रेलवे रोड (मामला 1): यहाँ एक बच्चा एक कमर्शियल (व्यावसायिक) गाड़ी में भारी सामान की लोडिंग और अनलोडिंग का काम कर रहा था।
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गीता नगर IDPL (मामला 2): इस इलाके में स्थित एक वर्कशॉप में दूसरा नाबालिग बच्चा ई-रिक्शा रिपेयरिंग का काम करते हुए पकड़ा गया।
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रेलवे रोड (मामला 3): रेलवे रोड पर ही स्थित एक नाई की दुकान पर तीसरा बच्चा काम करते हुए मिला, जो दुकान में बाल समेटने का काम कर रहा था।
श्रम अधिकारी का बयान:
“इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को बाल श्रम के प्रति जागरूक करना और जहां भी बाल श्रमिक चिन्हित हों, वहां नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करना है। इन तीनों बच्चों से बाल श्रम करवाने वाले मालिकों के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।”
बाल श्रम के खिलाफ सख्त संदेश
प्रशासन की इस औचक कार्रवाई से ऋषिकेश के व्यापारियों और दुकानदारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नाबालिग बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम करवाना कानूनन अपराध है और भविष्य में भी इस तरह के चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेंगे। सभी दुकानदारों और प्रतिष्ठान स्वामियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी नाबालिग को काम पर न रखें, अन्यथा उनके खिलाफ जेल और जुर्माने जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

